
पंच👊नामा
रुड़की: हरिद्वार जिले में अवैध मीट के धंधे को लेकर एक नया मामला सामने आया है। रुड़की में बैठकर मंगलौर से लेकर पूरे जिले में गिरोहबंद तरीके से अवैध मीट का धंधा करने वाला माफिया रोजाना जगह बदल-बदल कर गोकशी करते हुए पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा है।
इसके साथ ही वैध मीट खरीदकर बिक्री करने वाले दुकानदारों पर दबाव बनाते हुए उन्हें धमकी दी जा रही है कि यदि अधिकृत फैक्ट्री से मीट खरीदा तो बहिष्कार करते हुए जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, चंद दिनों के भीतर रुड़की कोतवाली क्षेत्र के घनी आबादी वाले इलाके में गौकशी की दो बड़ी घटनाओं ने मीट माफिया के चेहरे से नकाब उतार कर रख दिया है।
लेकिन अभी तक माफिया पर कार्रवाई न होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस प्रशासन और नगर निगम के साथ-साथ टैक्स विभाग के लिए भी बिलों के फर्जीवाड़े की पड़ताल करना ज़रूरी हो गया है।
बाहर से आती है वैध मीट की सप्लाई……
हरिद्वार जिले में वर्तमान में कोई अधिकृत स्लॉटर हाउस नहीं है। ऐसे में जिले में वैध मीट की आपूर्ति पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होती आ रही है। अधिकृत स्रोत से आने वाले मीट की खरीद और बिक्री दस्तावेजों के आधार पर की जाती है। इसी वैध व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए अवैध मीट का कारोबार करने वाले लोग दुकानदारों को गुमराह कर रहे हैं। उन्हें फैक्ट्री से वैध मीट नहीं खरीदने की हिदायत दी जा रही है।
बिलों के खेल की भी सामने आ रही बात….
अवैध मीट कारोबार में बिलों के फर्जीवाड़े की बात भी सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार, मीट माफिया चंद कुंटल वैध मीट व बिल लेकर उनकी आड़ में 100 गुना अधिक अवैध मीट की बिक्री कर रहे हैं। फर्जी बिल बांटकर जिले में टनों के हिसाब से अवैध मीट खपाया जा रहा है। यह व्यवस्था सही है तो यह न केवल खाद्य सुरक्षा और व्यापार नियमों का उल्लंघन है, बल्कि वैध कारोबारियों के लिए भी बड़ी चुनौती है।
वैध मीट बढ़ा तो अवैध धंधे पर पड़ेगा असर…..
अवैध मीट का धंधा करने वाले लोगों को सबसे बड़ा खतरा वैध मीट की बिक्री बढ़ने से है। इसी वजह से दुकानदारों के बीच यह प्रचार किया जा रहा है कि यदि फैक्ट्री का वैध मीट जिले में बिकने लगा तो गौकशी बंद हो जाएगी और अवैध कारोबार से जुड़े लोगों का मुनाफा खत्म हो जाएगा। इसी डर को आधार बनाकर दुकानदारों पर दबाव बनाने और उन्हें वैध मीट खरीदने से रोकने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
नाम “छोटा, फर्जीवाड़ा बड़ा, मिलावट का गंभीर आरोप…..
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू गौकशी से जुड़ा है। गिरोह के सरगना का नाम भले ही छोटा हो, लेकिन उसका मिलावट और फर्जीवाड़े का धंधा बड़ा है। सूत्रों के अनुसार, जिले के देहात क्षेत्रों में गौकशी के बाद प्रतिबंधित मांस को अन्य मीट में मिलाकर बेचने का धंधा मीट माफिया करा रहा है। अवैध मीट की सप्लाई के लिए तैयार नेटवर्क का इस्तेमाल इस कारोबार में किए जाने की बात सामने आ रही है। इससे ये मामला और गंभीर हो जाता है और इसमें शामिल लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जरूरत है।
गौकशी की दो बड़ी कार्रवाई से उठे सवाल…..
रुड़की क्षेत्र में एक सप्ताह के भीतर गौकशी की दो बड़ी कार्रवाई सामने आने के बाद पूरे नेटवर्क को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं। तीन दिन पहले भी पुलिस ने अवैध मीट कारोबार से जुड़े एक पार्टनर के ठिकाने पर छापा मारकर गौकशी पकड़ी थी। इसके बावजूद सवाल यह है कि आखिर इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने वाले मुख्य व्यक्ति तक पुलिस कब पहुंचेगी?
बड़ी मछली तक क्यों नहीं पहुंच रही कार्रवाई…?
लगातार कार्रवाई में छोटे स्तर के लोगों और ठिकानों के सामने आने के बावजूद अवैध मीट कारोबार के मुख्य संचालक पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या रुड़की से पूरे जिले में अवैध मीट का धंधा चलाने वाले नेटवर्क को किसी का संरक्षण प्राप्त है? क्या दुकानदारों को धमकाने वालों पर पुलिस ने कोई मुकदमा दर्ज किया है? पंचायत में जुर्माने का फरमान जारी करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
पुलिस-प्रशासन और नगर निगम की भूमिका पर सवाल…..
अब पुलिस प्रशासन और नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती वैध मीट कारोबारियों को संरक्षण देने और अवैध मीट के धंधे पर पूरी तरह अंकुश लगाने की है। दुकानदारों को यदि वैध स्रोत से मीट खरीदने से रोका जा रहा है तो प्रशासन को इसकी जांच करानी चाहिए।
रुड़की में लगातार सामने आ रही गौकशी की घटनाओं और वैध मीट कारोबार को रोकने के लिए बनाए जा रहे दबाव ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। अब निगाहें पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं। सवाल यही है कि कार्रवाई छोटे मोहरों तक सीमित रहेगी या अवैध मीट कारोबार के पूरे सिंडिकेट की ‘बड़ी मछली’ तक भी कानून का हाथ पहुंचेगा?



