“बारिश ने किया मेले का खेल खराब..! कीचड़ और पानी से जूझते हुए किसी तरह सजाए गए झूले..
758वें सालाना उर्स के मुख्य दिन शुरू, मेला ग्राउंड बना दलदल; ठेकेदार बोले—बारिश थमी तो नए झूले और ‘जल परी’ कॉन्सेप्ट बनेगा खास आकर्षण..

पंच👊नामा
पिरान कलियर; हज़रत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक रहमतुल्लाह अलैह के 758वें सालाना उर्स/मेले की 10 तारीख लगने के साथ ही अब उर्स के मुख्य दिनों की रौनक परवान चढ़ने लगी है।
देश-दुनिया से जायरीनों की आमद लगातार बढ़ रही है, लेकिन इस बार लगातार हो रही बारिश ने मेले की व्यवस्थाओं का इम्तिहान ले लिया है। बारिश ने मेला क्षेत्र में जगह-जगह जलभराव और कीचड़ की स्थिति पैदा कर दी है। खासकर मेला ग्राउंड में लगने वाले झूला-सर्कस क्षेत्र में पानी और कीचड़ ने ठेकेदारों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।
बारिश और कीचड़ के बीच झूला-सर्कस संचालकों ने किसी तरह अधिकांश झूलों का स्ट्रक्चर खड़ा कर लिया है और मेले को सजाने-संवारने का काम जारी है। हालांकि ग्राउंड में जगह-जगह जमा बारिश का पानी अब भी परेशानी का सबब बना हुआ है। पानी की निकासी नहीं होने से मैदान की जमीन दलदल जैसी हो गई है, जिसके चलते भारी-भरकम झूलों और अन्य मनोरंजन उपकरणों को स्थापित करना भी आसान नहीं रहा।
झूला-सर्कस के ठेकेदार शहजाद ने बताया कि पिछले कई दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण पूरा मैदान कीचड़ में तब्दील हो गया है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश का पानी ग्राउंड में ही जमा हो रहा है। उन्होंने बताया कि झूलों का स्ट्रक्चर खड़ा करने के दौरान भी
कर्मचारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई स्थानों पर मिट्टी और अन्य सामग्री का भराव कराकर जमीन को समतल करने का प्रयास किया गया, लेकिन बारिश दोबारा होने से हालात फिर बिगड़ जाते हैं।
शहजाद के मुताबिक, इस बार जायरीनों और मेले में आने वाले बच्चों के मनोरंजन के लिए कुछ नए और अलग तरह के झूले लगाए गए हैं। खास तौर पर इस बार ‘जल परी’ वाला आकर्षक कॉन्सेप्ट भी मेले में देखने को मिलेगा, जो लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बन सकता है। इसके अलावा मनोरंजन के कई अन्य साधन भी तैयार किए जा रहे हैं, ताकि उर्स में आने वाले जायरीन इबादत के साथ-साथ मेले की रौनक का भी आनंद उठा सकें।
ठेकेदार का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में मौसम मेहरबान रहा और बारिश से राहत मिली तो मेला ग्राउंड पूरी तरह अपनी रंगत में नजर आएगा। झूले, सर्कस और अन्य मनोरंजन के साधनों से क्षेत्र गुलजार होगा और दूर-दराज से आने वाले जायरीनों व स्थानीय लोगों को बेहतर मनोरंजन मिल सकेगा।
फिलहाल 758वें सालाना उर्स के मुख्य दिन शुरू होते ही एक ओर जायरीनों की बढ़ती भीड़ से कलियर की फिजां रूहानी रंग में रंगने लगी है, तो दूसरी ओर बारिश ने मेले की रौनक पर कीचड़ और जलभराव का साया डाल दिया है। अब सबकी निगाहें मौसम पर टिकी हैं कि बारिश थमे और साबिर पाक की नगरी में सजे इस सालाना मेले की रौनक पूरे शबाब पर लौट सके।



