
पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार; शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया विभागीय लापरवाही के चलते सवालों के घेरे में है। पहली लाटरी जारी हुए करीब दो माह बीत चुके हैं, लेकिन दूसरी लाटरी अब तक नहीं खुली है। जिलेभर में बड़ी संख्या में RTE सीटें खाली पड़ी हैं, जबकि सैकड़ों बच्चे दाखिले के इंतजार में हैं। नया शैक्षिक सत्र शुरू हुए कई महीने गुजर जाने के बावजूद दूसरी लाटरी नहीं खुलने से अभिभावकों की चिंता बढ़ती जा रही है।
RTE के तहत जिले के निजी विद्यालयों में हर वर्ष बड़ी संख्या में सीटें निर्धारित की जाती हैं। इस बार भी हजारों आवेदन प्राप्त हुए। आवेदन और सत्यापन की प्रक्रिया के बाद पहली लाटरी अप्रैल में जारी की गई थी। इसमें बड़ी संख्या में बच्चों को प्रवेश मिला, लेकिन इसके बाद खाली रह गई सीटों को भरने के लिए दूसरी लाटरी अब तक जारी नहीं की गई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब निजी स्कूलों में RTE के तहत काफी सीटें खाली हैं और दाखिले के लिए पात्र बच्चों के आवेदन भी मौजूद हैं, तो दूसरी लाटरी में इतनी देरी क्यों हो रही है? दूसरी लाटरी की आस में कई अभिभावक बच्चों का अन्य स्कूलों में दाखिला नहीं करा रहे हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।
सत्र आगे बढ़ा, प्रक्रिया वहीं अटकी…..
RTE का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में शिक्षा का अवसर देना है। इसके लिए निजी विद्यालयों में सीटें आरक्षित की जाती हैं। लेकिन लाटरी प्रक्रिया में देरी से योजना का उद्देश्य ही प्रभावित होता नजर आ रहा है।
बड़ी संख्या में सीटें खाली होने के बावजूद दूसरी लाटरी में देरी पर विभागीय कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। ऐसे में जिलाधिकारी को भी मामले का संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब करना चाहिए, ताकि लंबित प्रक्रिया जल्द पूरी हो और पात्र बच्चों को समय पर शिक्षा का अधिकार मिल सके।



