“सतीकुण्ड जीर्णोद्धार में भ्र्ष्टाचार की गंध, पांच करोड़ का काम गुजरात की कंपनी को 61 करोड़ में देने पर सवाल, मेलाधिकारी पर धमकी देने का आरोप..
हरिद्वार के वयोवृद्ध भाजपा नेता अशोक त्रिपाठी ने सरकार को घेरा, मुख्यमंत्री धामी से स्थिति स्पष्ट करने की मांग, 22 को लेंगे बड़ा फैसला..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार; भाजपा के वरिष्ठ नेता, हरिद्वार के प्रथम जिला पंचायत अध्यक्ष, पूर्व मेला प्राधिकरण उपाध्यक्ष एवं श्रीगंगा सभा के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने सतीकुंड पुनरोद्धार परियोजना को लेकर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने दावा किया कि करीब पांच करोड़ रुपये की लागत वाले कार्य को 61 करोड़ रुपये में स्वीकृत कर गुजरात की कंपनी को सौंपा गया। साथ ही मेला अधिकारी सोनिका पर परोक्ष रूप से धमकी देने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें डराने या गुमराह करने की कोशिश करने वालों की इतनी हैसियत नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग की।
प्रेसवार्ता में अशोक त्रिपाठी ने कहा कि वह पिछले 50 वर्षों से भाजपा के सक्रिय सदस्य हैं, लेकिन पार्टी में कार्यकर्ताओं की बात सुनने के लिए कोई मंच या बैठक नहीं हो रही है। ऐसे में उन्हें अपनी बात मीडिया के माध्यम से रखनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हरिद्वार को राज्य में शामिल कराने के लिए उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई थी। उस समय भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी भी इस मुहिम से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि जिस उत्तराखंड की परिकल्पना की गई थी, आज वैसा राज्य नहीं बन पाया है और हरिद्वार की लगातार उपेक्षा हो रही है।
उन्होंने कहा कि सतीकुंड एक प्राचीन एवं पौराणिक तीर्थ है, जहां कार्तिक पूर्णिमा पर हरकी पैड़ी से भी अधिक श्रद्धालु स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते थे। इस तीर्थ का पुनरोद्धार होना चाहिए, लेकिन इसके नाम पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। उनका आरोप है कि जिस कार्य की वास्तविक लागत पांच करोड़ रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए थी, उसे 61 करोड़ रुपये में स्वीकृत किया गया।
त्रिपाठी ने कहा कि परियोजना की डीपीआर यूयूआईडीसी ने तैयार की, कार्यदायी संस्था एनबीसीसी बनाई गई और ठेका अहमदाबाद (गुजरात) की कंपनी को दे दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उत्तराखंड में ऐसी कोई एजेंसी नहीं थी जो यह कार्य कर सकती थी। उन्होंने मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के दावे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को इस पूरे मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से मिलने का कई बार प्रयास किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। मजबूर होकर उन्हें मीडिया के सामने आना पड़ा। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी कोई पद नहीं मांगा और वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की उस सोच में विश्वास रखते हैं, जिसमें कार्यकर्ता को सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है।
‘मुझे धमकाने की हैसियत किसी की नहीं’….
अशोक त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि मेला अधिकारी सोनिका ने उन्हें बातचीत के दौरान परोक्ष रूप से धमकी दी। उन्होंने कहा, “मेला अधिकारी को कहना चाहता हूं कि मुझे गुमराह करने और धमकी देने की आपकी इतनी हैसियत नहीं है। मैं 20 बार जेल जा चुका हूं। राम जन्मभूमि आंदोलन में भी जेल गया हूं। जमानत तो दूर, कभी निजी मुचलका तक नहीं दिया। इसलिए मुझे डराने का प्रयास न किया जाए। “उन्होंने कहा कि पूरे मामले को लेकर 22 जुलाई को आगे की रणनीति तय की जाएगी। साथ ही सरकार से सतीकुंड परियोजना की लागत, ठेका प्रक्रिया और कार्यदायी संस्था के चयन की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
दूसरी तरफ, मेला अधिकारी सोनिका सिंह ने कहा कि सतीकुंड परियोजना की डीपीआर को प्रदेश के मुख्य सचिव,प्रमुख सचिव सहित वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियो ने पर्यवेक्षण कर अनुमति दी है। उन्होंने कहा कि योजना के निर्माण में यदि कोई खामी प्रकाश में आएगी या लाई जाएगी उसका त्वरित संज्ञान लिया जाएगा। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि इस प्राचीन स्थल का विकास , सौन्दर्यकरण बहुत ही गुणवता के साथ किया जाएगा। मेला अधिकारी ने भाजपा नेता द्वारा दबाव बनाने के उन पर लगाए गए आरोप को सिरे से नकार दिया। कहा कि उन्हें पूरे सम्मान के साथ सुना गया और बातचीत के समय अपर मेलाधिकारी दयानंद व उपमेला अधिकारी मौजूद रहे हैं।



