पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: दिल्ली के छोले, मथुरा का पेड़ा, आगरा का पेठा और हरिद्वार में मोहन की पूरी… ये ऐसे नाम हैं, जिनसे लगभग हर आम आदमी परिचित है। लेकिन धर्मनगरी हरिद्वार में एक और चीज लोगों की जुबान पर है।
चर्चा उन कथित “मिनी ठेकों” की, जो देर रात तक शराब के शौकीनों के लिए “आवश्यक सेवा केंद्र” बने हुए हैं, शहर की एक मुख्य चौराहे पर ऐसा ही एक मिनी ठेका कई बड़े-बड़े ठेकों को मात देने के लिए काफी है। बीच सड़क और चौराहे पर “खुला खेल फर्रुखाबादी” किसे कहते हैं यह शंकर जी के मिनी ठेके को देखकर आसानी से समझा जा सकता है।
शहर के मशहूर और व्यस्त चौराहे पर दिन में यह जगह आम लोगों को एक साधारण दुकान जैसी दिखाई देती है, लेकिन शाम ढलते ही यहां का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। फिर क्या देसी और क्या अंग्रेजी शराब, किसी भी कंपनी की बीयर तक उपलब्ध होती है। सरकारी शराब की दुकानों के शटर 10:30 तक गिर जाते हैं, लेकिन “मिनी ठेके” उसके बाद भी गुलज़ार रहते हैं।
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बाहर फास्ट फूड का ठेला, अंदर असली खेला….!
बाहर से देखने पर यह केवल एक छोटी ठेली या सामान्य दुकान नजर आती है। हालांकि, ठेला लगाने से कुछ छुप नहीं जाता, ठेले के अगल-बगल खड़ी होने वाली स्कूटियों की डिक्कियां स्टॉक से भरी रहती हैं, अंदर भुगतान कर ग्राहक कई बार खुद डिक्की से माल रिसीव कर लेते हैं।
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जायसवाल जी की होम डिलीवरी के क्या कहने….
जायसवाल नामक शराब माफिया के तो क्या ही कहने। जहां शराब का नाम लेना भी पाप है, जहां मोबाइल का नेटवर्क भी दम तोड़ देता है, इनका नेटवर्क उससे आगे तक शराब की डिलीवरी पहुंचाता है। शाम ढलते ही माफिया की फौज अपने टारगेट को पूरा करने पर जुट जाती है। गुर्गों की डिलीवरी इतनी फास्ट है कि जोमैटो और स्विग्गी को भी पीछे छोड़ देते हैं। ऐसा बताया जाता है कि शराब के कई सरकारी ठेके ही जायसवाल जी की कृपा पर चल रहे हैं।
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बाहर पर्दा, अंदर उड़ रहा गर्दा…….
हरिद्वार के मिनी ठेकों जैसा ही नजारा 40वीं वाहिनी पीएसी के आसपास संचालित हो एक मिनी ठेके का है। जहां पर्दा डालकर खूब गर्दा उड़ाया जाता है। बाकी ठेकों की तरह यह मिनी ठेका भी मुख्य मार्ग पर ही संचालित हो रहा है। बाहर से पर्दा देखकर कुछ लोग इसे वीडियो गेम्स पार्लर समझ लेते हैं, लेकिन इस मिनी ठेके ने कुछ दिनों के भीतर ही पूरे क्षेत्र में नाम कमाया है।
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अगली किश्त में जल्द पढ़ें मिनी ठेकों से जुड़े कुछ और दिलचस्प खुलासे…



