“मेरठ घटना के विरोध में कांग्रेस अनुसूचित विभाग का प्रदर्शन, पुलिस अधिकारी के निलंबन की मांग..
सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पर प्रदर्शन कर भाजपा सरकार पर दलित उत्पीड़न का लगाया आरोप, निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार। मेरठ में प्रदर्शन कर रहे दलित समाज के लोगों पर पुलिस अधिकारी द्वारा कथित लाठीचार्ज और मारपीट के विरोध में सोमवार को कांग्रेस अनुसूचित विभाग ने सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए संबंधित पुलिस अधिकारी को तत्काल निलंबित करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कांग्रेस अनुसूचित विभाग के जिलाध्यक्ष तीरथ पाल रवि ने कहा कि मेरठ की घटना से सरकार और प्रशासन का दलित समाज के प्रति रवैया उजागर हो गया है। उन्होंने कहा कि दलित बेटी को न्याय दिलाने की मांग कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज करना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। भाजपा सरकार विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
महानगर अध्यक्ष अमन गर्ग, मुरली मनोहर और महेश प्रताप सिंह राणा ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही मृतक दलित बेटी को न्याय दिलाने और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की। वीरेंद्र श्रमिक और सीपी सिंह ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ मारपीट लोकतंत्र के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाया कि संबंधित पुलिस अधिकारी ने किसके निर्देश पर कार्रवाई की और उसके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाने चाहिए।
प्रदर्शन में पार्षद सुनील कुमार, सोहित सेठी, विवेक भूषण विक्की, हिमांशु गुप्ता, नेत्रपाल सिंह अष्टवाल, वीपी सिंह तेजियांन, आशीष पंवार, सत्यपाल शास्त्री, सुभाष कुमार, प्रवीण कुमार, मनोज धनगर, अरुण चौहान, एलएस रावत, दीवान चंद, अजय दास महाराज, आदेश प्रधान, अक्षय नागपाल, महेश चंद्र, मोनू कुमार, अमित नौटियाल, जतिन हांडा, रकित वालिया, प्रियव्रत, जगपाल सिंह समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
दलित मुद्दों पर अनुसूचित विभाग सक्रिय, कांग्रेस मुख्य संगठन चुप….
देशभर में दलितों पर होने वाले अत्याचार और उत्पीड़न के मामलों को लेकर हरिद्वार में कांग्रेस अनुसूचित विभाग लगातार मुखर नजर आ रहा है। विभिन्न घटनाओं पर विभाग की ओर से प्रदर्शन और ज्ञापन दिए जा रहे हैं। वहीं, इन मुद्दों पर कांग्रेस की मुख्य जिला और महानगर नेतृत्व की सक्रियता अपेक्षाकृत कम दिखाई देने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया है। स्थानीय स्तर पर इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि दलित समाज से जुड़े संवेदनशील मामलों में अनुसूचित विभाग लगातार आगे है, जबकि कांग्रेस की मुख्य टीम की ओर से अपेक्षित सक्रियता देखने को नहीं मिल रही है।



