“आर्थिक तंगी ने रोका परिवार, हरिद्वार पुलिस ने निभाया बेटे का फर्ज, ‘भंडारे वाले बाबा’ को दी अंतिम विदाई..
पोस्टमार्टम के बाद खड़खड़ी श्मशान घाट पर हिंदू रीति-रिवाज से कराया गया अंतिम संस्कार..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार; इंसानियत और संवेदनशील पुलिसिंग की एक भावुक मिसाल हरिद्वार में देखने को मिली। वर्षों तक हर की पैड़ी क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सूक्ष्म भंडारों का आयोजन कराने वाले
“भंडारे वाले बाबा” के नाम से प्रसिद्ध व्यक्ति का जब आर्थिक तंगी के कारण कोई परिजन अंतिम संस्कार के लिए हरिद्वार नहीं पहुंच सका, तब हरिद्वार पुलिस ने आगे बढ़कर मानवता का फर्ज निभाया और पूरे सम्मान के साथ हिंदू रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार कराया।
जानकारी के अनुसार, गत 9 जुलाई को पुलिस कंट्रोल रूम के समीप स्थित शौचालय में एक व्यक्ति का शव मिलने की सूचना पर हरिद्वार पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई और पंचायतनामा भरने के बाद शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखवाया और मृतक की शिनाख्त के प्रयास शुरू किए।
जांच के दौरान मृतक की पहचान रमाशंकर गुप्ता पुत्र दया प्रसाद गुप्ता, निवासी ग्राम कुइया, थाना पिहानी, जिला हरदोई (उत्तर प्रदेश), उम्र लगभग 58 वर्ष के रूप में हुई। पता चला कि वह पिछले कई वर्षों से
हर की पैड़ी क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सहयोग राशि लेकर छोटे-छोटे भंडारों का आयोजन कराते थे और इसी कारण स्थानीय लोगों व यात्रियों के बीच “भंडारे वाले बाबा” के नाम से जाने जाते थे।
पुलिस ने मृतक के परिजनों से संपर्क किया तो जानकारी मिली कि उनकी पत्नी और संतान नहीं है। परिवार में केवल उनके भाई का परिवार है, जो गंभीर आर्थिक तंगी के कारण हरिद्वार आने में असमर्थ था। ऐसे में अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी हरिद्वार पुलिस ने अपने कंधों पर उठा ली।
शहर कोतवाल कुंदन सिंह राणा के निर्देशन में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराने के बाद कोतवाली नगर पुलिस ने खड़खड़ी श्मशान घाट पर पूरे सम्मान और हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार रमाशंकर गुप्ता का अंतिम संस्कार कराया।
इस मानवीय पहल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था संभालने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर वह अपनों से बिछड़ चुके लोगों की अंतिम यात्रा में भी परिवार बनकर साथ खड़ी होती है।
हरिद्वार पुलिस की इस संवेदनशील पहल की स्थानीय लोगों ने भी सराहना की और इसे इंसानियत की सच्ची मिसाल बताया।



