हरिद्वार

“मासूम मिला लावारिस, कलियर पुलिस बनी फरिश्ता, घंटों की मेहनत के बाद पिता की गोद में पहुंचा लाल..

वरिष्ठ उपनिरीक्षक राजेश बिष्ट के निर्देशन में चली खोज, हेडकांस्टेबल जमशेद अली की सतर्कता से टली संभावित अनहोनी..

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पंच👊नामा
पिरान कलियर: बच्चा चोरी और अपहरण जैसी संगीन घटनाओं के बावजूद यदि अभिभावक सतर्क नहीं होंगे तो जरा सी लापरवाही बड़ी मुसीबत का कारण बन सकती है। बीते 24 घंटे से पिरान कलियर से गायब सात माह के मासूम की तलाश में पुलिस की कई टीमें अलग-अलग जिलों और राज्यों में दौड़ लगा रही हैं, वहीं इसी बीच कलियर दरगाह क्षेत्र से एक सुखद खबर सामने आई है। पुलिस की मुस्तैदी और तत्परता के चलते लावारिस हालत में मिले दो वर्षीय मासूम को सुरक्षित उसके परिजनों तक पहुंचाकर एक संभावित अनहोनी को टाल दिया गया।वरिष्ठ उपनिरीक्षक राजेश बिष्ट के निर्देशन में शुरू हुई परिजनों की तलाश….
दरगाह क्षेत्र में मासूम के मिलने की सूचना मिलते ही कलियर कोतवाली में तैनात वरिष्ठ उपनिरीक्षक राजेश बिष्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल बच्चे के परिजनों की तलाश शुरू कराई। उन्होंने विभिन्न माध्यमों से सूचना प्रसारित करने के निर्देश दिए और बच्चे की पहचान कराने के लिए हर संभव प्रयास किए। लगातार कई घंटों तक चली कवायद के बाद बच्चे के पिता दानिश निवासी रामपुर (उत्तर प्रदेश) कोतवाली पहुंचे, जहां आवश्यक पूछताछ और सत्यापन के बाद उन्हें उनका बेटा सकुशल सौंप दिया गया।हेडकांस्टेबल जमशेद अली की सतर्कता बनी मासूम की सुरक्षा की वजह….
दरअसल, कलियर कोतवाली में तैनात हेडकांस्टेबल जमशेद अली पैदल गश्त पर थे, तभी उन्हें दरगाह क्षेत्र में दो वर्षीय मासूम लावारिस हालत में घूमता दिखाई दिया। उन्होंने बिना देर किए बच्चे को अपने संरक्षण में लिया और सुरक्षित कोतवाली पहुंचाया। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराते हुए अलाउंसमेंट समेत अन्य माध्यमों से उसके परिजनों की तलाश शुरू की। उनकी सतर्कता और मानवीय संवेदनशीलता के चलते बच्चा सही-सलामत अपने पिता की गोद तक पहुंच सका।एक छोटी सी लापरवाही बन सकती थी बड़ी वारदात की वजह……
गौरतलब है कि बीते दिन हरिद्वार में एक बच्चे के अपहरण और पिरान कलियर से सात माह के मासूम के गायब होने की घटनाएं सामने आई थीं, जिनके सीसीटीवी फुटेज भी सामने आए हैं। इन मामलों में पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है और अलग-अलग टीमें लगातार तलाश में जुटी हुई हैं। ऐसे हालात में अभिभावकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। जरा सी असावधानी या बच्चों पर से कुछ पल के लिए भी ध्यान हटना किसी बड़ी घटना की वजह बन सकता है।जागरूकता का संदेश……
मासूम बच्चों की सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सबसे पहली जिम्मेदारी उनके परिजनों की है। भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों को अकेला छोड़ना या उन पर नजर न रखना भारी पड़ सकता है। पिरान कलियर पुलिस की मुस्तैदी ने इस बार एक संभावित हादसे को टाल दिया, लेकिन हर बार किस्मत और समय इतना मेहरबान हो, यह जरूरी नहीं। इसलिए सतर्क रहें, बच्चों का हाथ थामे रखें और छोटी सी लापरवाही को बड़ी मुसीबत में बदलने का मौका न दें।

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