
पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: गंगा घाट पर पेड़ के नीचे गहरी नींद में सो रहे परिवार की गोद से चार माह की मासूम को उठाकर ले जाने वाले शातिरों की चाल आखिरकार हरिद्वार पुलिस के सामने नहीं चल सकी। कनखल और पिरान कलियर से बच्चों की सकुशल बरामदगी के बाद अब हरिद्वार पुलिस ने एक और बड़ी चुनौती को पार करते हुए करीब दस दिन पहले चोरी हुई मासूम बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया।
बच्ची की तलाश में पुलिस टीम हरिद्वार से लेकर पश्चिम बंगाल के हावड़ा तक पहुंची और आखिरकार तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर मासूम को उसके परिजनों की गोद में सौंप दिया। दिलचस्प बात यह रही कि आरोपी दंपत्ति बच्ची को लड़का समझकर उठा ले गए थे और बाद में उसे बेचने की फिराक में दोबारा हरिद्वार पहुंचने पर पुलिस के हत्थे चढ़ गए।
हरिद्वार एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने प्रेस कांफ्रेंस में पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि 27 मई की रात संभल (उत्तर प्रदेश) निवासी पुष्पेंद्र अपने परिवार के साथ गंगा स्नान के लिए हरिद्वार आए थे। विष्णुघाट के समीप हाथी पुल के पास पेड़ के नीचे परिवार सो गया था।
सुबह चार माह की बेटी गायब मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई। जिले में लगातार सामने आ रही बच्चा चोरी की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए स्वयं मामले की मॉनिटरिंग की गई और टीमों को बच्ची की सकुशल बरामदगी के लिए विशेष दिशा-निर्देश दिए गए।
एसपी सिटी अभय सिंह ने बताया कि बच्ची के चोरी होने का सटीक समय स्पष्ट नहीं होने के कारण पुलिस ने घटनास्थल के आसपास की गतिविधियों और संदिग्धों की मूवमेंट का बारीकी से विश्लेषण किया। जांच के दौरान एक दंपत्ति पहले एक बच्चे के साथ विष्णुघाट पर घूमते और अगले दिन दो बच्चों के साथ रोडवेज बस में सवार होते दिखाई दिए।
बस चालक और परिचालक से पूछताछ में पता चला कि दंपत्ति धामपुर में उतरकर हावड़ा जाने वाली ट्रेन में सवार हुआ था। धामपुर से हावड़ा के बीच पड़ने वाले 65 रेलवे स्टेशनों पर जानकारी जुटाई गई, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया। इसके बाद पुलिस ने जांच का एंगल बदला और संदिग्धों की हरिद्वार में एंट्री और उनके ठिकानों की पड़ताल शुरू की।
शहर कोतवाल कुंदन सिंह राणा व एसओजी प्रभारी नरेंद्र सिंह बिष्ट के नेतृत्व में गठित टीम ने जांच को आगे बढ़ाते हुए ब्रह्मपुरी क्षेत्र में झाड़-फूंक करने वाले सत्यपाल उर्फ बाबा की झोपड़ी तक पहुंच बनाई। दबिश देकर पुलिस ने सत्यपाल के साथ इटावा निवासी लाल बहादुर और उसकी पत्नी प्रीति रानी को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से चार माह की मासूम बच्ची सकुशल बरामद हो गई।
पूछताछ में आरोपितों ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि एक परिचित दंपत्ति को बेटे की जरूरत थी और लड़का देने के एवज में तीन लाख रुपये मिलने थे। लालच में आकर आरोपितों ने हरिद्वार के घाटों से बच्चा चोरी करने की योजना बनाई। 27 मई की रात मौका मिलने पर उन्होंने सो रहे परिवार के बीच से मासूम को उठाया, लेकिन बाद में पता चला कि वह लड़की है।
इसके बाद वह बच्ची को लेकर अपने गांव चले गए और फिर किसी अन्य व्यक्ति को बेचने के इरादे से हरिद्वार लौटे, जहां पुलिस ने उन्हें धर दबोचा। पुलिस के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में सत्यपाल पुत्र विजय सिंह निवासी सैदाबाद, कोतवाली लक्सर हरिद्वार, लाल बहादुर पुत्र कन्हैया लाल निवासी नगरिया, थाना जसवंत नगर, जनपद इटावा (उत्तर प्रदेश) व उसकी पत्नी प्रीति रानी को गिरफ्तार किया गया है।
इन पुलिसकर्मियों ने निभाई अहम भूमिका….
मुख्य टीम 1- प्रभारी निरीक्षक कुंदन सिंह राणा 2- वरिष्ठ उपनिरीक्षक गोपाल भट्ट 3- उपनिरीक्षक नवीन चौहान 4- उपनिरीक्षक संजीत कंडारी 5- उपनिरीक्षक नवीन नेगी 6- उपनिरीक्षक ऋषिकांत पटवाल 7- उपनिरीक्षक विक्रम बिष्ट 8- हेड कांस्टेबल सतीश नौटियाल
9- हेड कांस्टेबल संजयपाल 10- हेड कांस्टेबल संजीव राणा 11- कांस्टेबल निर्मल रागढ़ 12- कांस्टेबल सुनील चौहान 13- कांस्टेबल अजीत तोमर 14- कांस्टेबल राकेश 15- कांस्टेबल जसवंत (बहादराबाद)
तकनीकी टीम 1- सीआईयू प्रभारी नरेंद्र सिंह बिष्ट 2- कांस्टेबल वसीम 3- कांस्टेबल हरवीर 4- कांस्टेबल द्वीप गौड़ 5- कांस्टेबल नरेंद्र 6- कांस्टेबल उमेश।
लगातार तीसरी बड़ी सफलता हासिल करने के बाद आमजन हरिद्वार पुलिस की सक्रिय कार्यशैली और एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के नेतृत्व की खुलकर सराहना कर रहे हैं। बच्चा चोरी की घटनाओं पर ताबड़तोड़ कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि हरिद्वार पुलिस चुनौती चाहे जितनी बड़ी हो, उसे अंजाम तक पहुंचाना बखूबी जानती है।



