हरिद्वार

“धनौरी हादसे ने खोली पुलिस की ‘सुरक्षित छत’ की पोल, रुड़की सिविल लाइंस कोतवाली में भी जर्जर भवन का खतरा; छत का प्लास्टर उखड़ा, सरिए दे रहे हालात की गवाही..

जिस छत के नीचे उपनिरीक्षक करते हैं विवेचनाओं की लिखा-पढ़ी, उसी लेंटर में जगह-जगह दिख रहे सरिए; पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल..

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पंच👊नामा
जगदीश शर्मा देशप्रेमी, रुड़की; धनौरी में जर्जर भवन का हिस्सा गिरने से पीएसी जवान मोहम्मद आदिल की मौत के बाद पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और सुरक्षित कार्यस्थल का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। इसी बीच रुड़की सिविल लाइंस कोतवाली की जर्जर हालत भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है। कोतवाली परिसर में जिस भवन में उपनिरीक्षक बैठकर पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं, वहीं छत की हालत देखकर भवन की मजबूती को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है। छत का प्लास्टर कई जगह से उखड़ा हुआ है और लेंटर में लगे सरिए तक साफ दिखाई दे रहे हैं।यह वही स्थान है, जहां उपनिरीक्षक बैठकर प्रतिदिन पुलिस से जुड़े कामकाज निपटाते हैं। मुकदमों की विवेचनाओं से संबंधित लिखा-पढ़ी, दस्तावेज तैयार करने और अन्य जरूरी पुलिसिया कार्य भी इसी परिसर में होते हैं। ऐसे में छत की जर्जर स्थिति महज भवन की खूबसूरती बिगड़ने का मामला नहीं, बल्कि वहां रोजाना काम करने वाले पुलिसकर्मियों की सुरक्षा से जुड़ा सवाल भी बन जाती है। कोतवाली की छत पर कई स्थानों पर प्लास्टर पूरी तरह उखड़ा है। लेंटर के भीतर लगे लोहे के सरिए खुले तौर पर दिखाई दे रहे हैं। छत पर जगह-जगह दरारें और टूट-फूट भी दिखाई देती है। तस्वीरें इस बात की गवाही दे रही हैं कि भवन की हालत पर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की जरूरत है।लेंटर में सरियों का इस तरह खुले में दिखाई देना यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर भवन की तकनीकी स्थिति का समय-समय पर निरीक्षण होता है या नहीं। हालांकि भवन की वास्तविक मजबूती और संरचनात्मक सुरक्षा का आकलन तकनीकी जांच के बाद ही किया जा सकता है, लेकिन मौजूदा तस्वीरें कम से कम इतनी चिंता जरूर पैदा करती हैं कि जिम्मेदार विभाग को इसकी स्थिति का संज्ञान लेकर विशेषज्ञों से जांच करानी चाहिए। सिविल लाइंस कोतवाली पुलिस के लिए महत्वपूर्ण थाना है। यहां तैनात उपनिरीक्षकों को रोजाना विभिन्न मामलों की विवेचना से जुड़े दस्तावेज तैयार करने होते हैं। फरियादियों से बातचीत, पुलिस रिकॉर्ड का काम और मुकदमों से संबंधित जरूरी कार्रवाई भी लगातार चलती रहती है। ऐसे में जिस छत के नीचे पुलिसकर्मी घंटों बैठकर अपनी ड्यूटी निभाते हैं, उसकी हालत सवालों के घेरे में आना स्वाभाविक है। पुलिसकर्मी जनता की सुरक्षा के लिए लगातार जिम्मेदारी निभाते हैं, लेकिन उनके अपने कार्यस्थल की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।धनौरी में पीएसी जवान की मौत के बाद अस्थायी ठिकानों और पुराने भवनों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। अब सिविल लाइंस कोतवाली की जर्जर छत की तस्वीरें सामने आने के बाद यह मुद्दा और गंभीर हो गया है कि पुलिस महकमे के पुराने भवनों की नियमित तकनीकी जांच कितनी जरूरी है। पुलिसकर्मियों से 24 घंटे कानून-व्यवस्था संभालने की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में उनके बैठने और काम करने के स्थान सुरक्षित हों, यह भी विभागीय व्यवस्था का अहम हिस्सा होना चाहिए। जर्जर छत से सरिए बाहर निकल आने की स्थिति देखकर कम से कम इतना जरूर कहा जा सकता है कि इस भवन की तकनीकी जांच में देरी नहीं होनी चाहिए।पुलिसकर्मी के लिए हथियार, वर्दी और ड्यूटी जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही जरूरी उसका सुरक्षित कार्यस्थल भी है। अगर किसी कोतवाली की छत ही इस स्थिति में पहुंच जाए कि उसका प्लास्टर उखड़ चुका हो और लेंटर के सरिए नजर आने लगें, तो वहां काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना लाजिमी है।

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