
पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: चंडी देवी रोपवे मार्ग के पास झाड़ियों में मिले अज्ञात महिला के सड़े-गले शव की गुत्थी सुलझाते हुए हरिद्वार पुलिस ने एक बेहद चुनौतीपूर्ण ब्लाइंड मर्डर केस का पर्दाफाश कर दिया।
करीब 25 दिनों तक चली मैराथन जांच, 600 घंटे से अधिक सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण, लाखों मोबाइल नंबरों की पड़ताल और 700 किलोमीटर दूर बुंदेलखंड तक पहुंची पुलिस टीम की मेहनत रंग लाई। पुलिस कप्तान नवनीत सिंह ने रविवार को एसपी सिटी कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया।
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पहचान मिटाने के लिए चुना था हरिद्वार…….
एसएसपी नवनीत सिंह ने बताया कि 10 मई को थाना श्यामपुर क्षेत्र में चंडी देवी मंदिर रोपवे के पास बंद पड़े पैदल मार्ग से करीब 10 मीटर अंदर झाड़ियों में एक महिला का नग्न अवस्था में शव मिला था। शव काफी पुराना होने के कारण चेहरा पूरी तरह सड़ चुका था। मौके से दो कुंडल, टूटा मंगलसूत्र, सफेद गमछा और गले में कसकर बंधा ब्लाउज बरामद हुआ था।
प्रारंभिक जांच में गला घोंटकर हत्या की आशंका सामने आई थी। पहचान नहीं होने पर पुलिस खुद वादी बनी और अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। मृतका के हाथों पर बने टैटू पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सुराग साबित हुए। दाहिने हाथ पर अंग्रेजी में “KAUSHILYA” और फूलदान का चिन्ह, जबकि बाएं हाथ पर दिल के आकार में “K.R.” तथा हथेली के पीछे ओम का निशान बना हुआ था।
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164 कौशल्या और 3540 महिलाओं का खंगाला रिकॉर्ड……
मृतका की पहचान के लिए पुलिस ने डीसीआरबी, एससीआरबी और एनसीआरबी से सहयोग लिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, गुमशुदगी रिकॉर्ड, निर्वाचन डाटा और विभिन्न राज्यों के पुलिस रिकॉर्ड खंगाले गए।
जांच में वर्ष 2019 से अब तक कौशल्या नाम की 164 गुमशुदा महिलाओं का विवरण मिला, जबकि निर्वाचन अभिलेखों में 3540 महिलाओं का रिकॉर्ड सामने आया। पुलिस ने सभी संभावित सूचनाओं का सत्यापन कराया। इसके साथ ही करीब 144 घंटे के डंप डाटा से प्राप्त 1.64 लाख से अधिक मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया गया। ट्रूकॉलर और अन्य तकनीकी माध्यमों से नंबरों की पहचान की गई।
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एक फुटेज ने बदल दी जांच की दिशा…….
एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह ने बताया कि आंधी-तूफान के कारण अधिकांश सीसीटीवी कैमरे क्षतिग्रस्त थे, लेकिन 8 मई की सीमित फुटेज में रात के समय तीन पुरुषों और एक महिला को चंडी देवी मंदिर की ओर जाते देखा गया। वापसी में महिला उनके साथ दिखाई नहीं दी। यहीं से पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिला। रूट चार्ट, मोबाइल लोकेशन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस बांदा जिले तक पहुंची। जांच में राकेश, रामप्रकाश उर्फ गोविंदा और छेदीलाल के नाम सामने आए। इसके बाद पुलिस टीम ने बुंदेलखंड पहुंचकर तीनों को हिरासत में लिया।
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शादी का दबाव बना हत्या की वजह……
पूछताछ में आरोपितों ने स्वीकार किया कि रामप्रकाश और कौशल्या के बीच प्रेम संबंध थे। कौशल्या लगातार शादी की जिद कर रही थी। इससे परेशान होकर रामप्रकाश ने अपने भाई और जीजा के साथ मिलकर उसकी हत्या की योजना बनाई। आरोपित उसे चंडी देवी के दर्शन कराने के बहाने हरिद्वार लाए और सुनसान स्थान पर ले जाकर गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद शव झाड़ियों में फेंककर फरार हो गए। आरोपितों को विश्वास था कि घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर हत्या करने पर मृतका की पहचान नहीं हो सकेगी, लेकिन तकनीकी विवेचना और टीमवर्क ने उनकी पूरी साजिश नाकाम कर दी।
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गिरफ्तार आरोपित…..
1:- रामप्रकाश उर्फ गोविंदा पुत्र राजा, निवासी ग्योडीबाबा, कोतवाली नगर बांदा
2:- राकेश पुत्र राजा, निवासी ग्योडीबाबा, कोतवाली नगर बांदा
3:- छेदीलाल पुत्र ईशूरी प्रसाद, निवासी काहला गंछा, कोतवाली नगर बांदा उत्तर प्रदेश
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थाना श्यामपुर प्रभारी निरीक्षक नितेश शर्मा ने एक बार फिर अपनी तेज तर्रार कार्यशैली और विवेचना क्षमता का परिचय दिया है। बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण इस ब्लाइंड मर्डर केस में उन्होंने एसओजी और थाना पुलिस की टीम के साथ लगातार फील्ड में रहकर महत्वपूर्ण सुराग जुटाए। शव की पहचान से लेकर आरोपितों तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में उनकी भूमिका अहम रही।
इससे पहले भी नितेश शर्मा कई चर्चित ब्लाइंड मर्डर और जटिल आपराधिक मामलों का सफल अनावरण कर चुके हैं। मामले के खुलासे के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह ने विशेष रूप से नितेश शर्मा और उनकी टीम की सराहना करते हुए उन्हें शाबाशी दी। एसएसपी नवनीत सिंह ने बताया कि मामले के खुलासे के लिए एसपी क्राइम निशा यादव के पर्यवेक्षण व एसपी सिटी अभय सिंह और सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई थी।
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टीम में एसओजी प्रभारी निरीक्षक नरेन्द्र सिंह बिष्ट, थानाध्यक्ष श्यामपुर नितेश शर्मा, वरिष्ठ उपनिरीक्षक मनोज रावत, उपनिरीक्षक सन्तोष सेमवाल, मोहन कठैत, महिला उपनिरीक्षक रचना पठानिया, अपर उपनिरीक्षक रविन्द्र गौड़ और दरम्यान सिंह शामिल रहे। इनके साथ हेड कांस्टेबल प्रेम सिंह, पंकज देवली, कांस्टेबल राहुल देव, विनीत कुमार, अनिल रावत, सुशील चौहान, तेजेंद्र सिंह, ओमवीर सिंह, जितेंद्र घिल्डियाल, अजय चौहान, मनमोहन सिंह तथा महिला कांस्टेबल माधुरी त्रिपाठी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एसओजी हरिद्वार से कांस्टेबल वसीम, उमेश, हरवीर सिंह और दीप गौड़ भी लगातार जांच में जुटे रहे। तकनीकी विश्लेषण से लेकर उत्तर प्रदेश के बांदा तक जाकर साक्ष्य जुटाने और आरोपितों की गिरफ्तारी तक टीम ने समन्वय के साथ काम किया, जिसकी बदौलत पुलिस इस ब्लाइंड मर्डर केस की गुत्थी सुलझाने में सफल रही।



