“शिवालिक नगर पालिका का हिस्सा बनकर नरक बन गई पांच कालोनियां, हिस्से में आए केवल नेताओं के वादे..
सिद्धांत एनक्लेव, केशव विहार, गणेश विहार, खालसा कॉलोनी और अलप्स कॉलोनी में न सफाई की व्यवस्था, न जल निकासी, निर्दलीय सभासद, भाजपा अध्यक्ष और भाजपा विधायक के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा भुगत रहे हजारों लोग..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार; शिवालिक नगर पालिका का हिस्सा बनने के बाद सिडकुल क्षेत्र से सटी सिद्धांत एनक्लेव, केशव विहार, गणेश विहार, खालसा कॉलोनी और अलप्स कॉलोनी सहित आसपास की कॉलोनियों के हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं।
नगर पालिका में शामिल होने से पहले लोगों को उम्मीद थी कि उन्हें बेहतर सड़कें, नियमित सफाई, मजबूत जल निकासी व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन आज स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विकास के नाम पर केवल वादे मिले, जबकि कॉलोनियां बदहाली और गंदगी का पर्याय बन गई हैं
कॉलोनियों में नियमित सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। घरों से समय पर कूड़ा नहीं उठाया जाता, जिसके चलते लोग मजबूरी में खाली पड़े प्लॉटों में कचरा फेंक रहे हैं। कई खाली प्लॉट अब अस्थायी डंपिंग ग्राउंड बन चुके हैं। जगह-जगह फैली गंदगी से दुर्गंध उठ रही है और मक्खी-मच्छरों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है।
जल निकासी की स्थिति भी बेहद खराब है। अधिकांश नालियां टूटी पड़ी हैं और कई स्थानों पर गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। वंदना कटारिया स्टेडियम से हेतमपुर जाने वाले मार्ग पर स्थित स्कूल के समीप बिना बारिश के भी जलभराव बना रहता है। स्कूली बच्चों, महिलाओं और राहगीरों को रोजाना गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि शिवालिक नगर पालिका में शामिल किए जाने से पहले चुनाव के दौरान विकास के बड़े-बड़े वादे किए गए थे। लोगों से कहा गया था कि क्षेत्र की सभी मूलभूत समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से किया जाएगा। इन्हीं वादों पर भरोसा कर लोगों ने मतदान किया और सभासद तथा पालिकाध्यक्ष का चुनाव कराया, लेकिन चुनाव खत्म होते ही क्षेत्र विकास की दौड़ में पीछे छूट गया।
आपसी राजनीति में उलझ रहा विकास…..
स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र के विकास पर राजनीतिक खींचतान का भी सीधा असर पड़ रहा है। इस वार्ड के सभासद निर्दलीय हैं, जबकि शिवालिक नगर पालिका के अध्यक्ष भाजपा से हैं और क्षेत्र के विधायक भी भाजपा के हैं।
लोगों का कहना है कि आपसी समन्वय की कमी और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसका सबसे बड़ा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि विकास किसी दल या व्यक्ति का नहीं, बल्कि जनता का अधिकार है, लेकिन यहां राजनीतिक खींचतान के चलते मूलभूत सुविधाएं भी लोगों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
स्थानीय निवासी वीरेंद्र रावत, सुमेश बिष्ट, अरविंद नौटियाल, दिलबर नेगी, चौधरी रविंदर, अंकित सैनी सहित कई अन्य लोगों का कहना है कि वे सभासद, पालिकाध्यक्ष, विधायक और संबंधित अधिकारियों से कई बार मिल चुके हैं। हर बार समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया गया, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि अब आश्वासनों से उनका भरोसा उठ चुका है।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित से अब आखिरी उम्मीद…..
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब उन्हें केवल जिलाधिकारी मयूर दीक्षित से ही उम्मीद बची है। उनका कहना है कि जिला मुख्यालय से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित इन कॉलोनियों की बदहाली प्रशासन के लिए भी चिंता का विषय होनी चाहिए। जहां जिलेभर की विकास और स्वच्छता योजनाओं पर बैठकें होती हैं, वहीं इतनी नजदीक बसे हजारों लोग गंदगी, जलभराव और बदहाल व्यवस्थाओं के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं।
लोगों ने जिलाधिकारी मयूर दीक्षित से मांग की है कि वे स्वयं क्षेत्र का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह बनाएं और नियमित सफाई, कूड़ा निस्तारण, टूटी नालियों की मरम्मत, जल निकासी व्यवस्था तथा सड़कों की समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित कराएं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि जिला प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप करता है तो हजारों परिवारों को नारकीय हालात से राहत मिल सकती है। अब पूरे क्षेत्र की निगाहें जिलाधिकारी के हस्तक्षेप पर टिकी हैं।



