
पंच👊नामा-ब्यूरो
देहरादून: चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की आस्था को निशाना बनाकर हेलीकॉप्टर बुकिंग के नाम पर लाखों रुपये की साइबर ठगी करने वाले संगठित गिरोह का उत्तराखंड एसटीएफ ने बड़ा खुलासा किया है। सोशल मीडिया पर फर्जी पेज बनाकर और व्हाट्सएप नंबरों के जरिए खुद को अधिकृत हेली सेवा एजेंट बताने वाले गिरोह के दो मुख्य सरगनाओं को बिहार से गिरफ्तार किया गया है। जांच में देशभर में फैले साइबर नेटवर्क, फर्जी बैंक खातों और करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन के अहम सुराग भी मिले हैं। वहीं कई अन्य फरार आरोपियों की तलाश में एसटीएफ की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
एसटीएफ कप्तान अजय सिंह के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत गठित “चारधाम यात्रा एंटी हेली फ्रॉड सेल” लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, संदिग्ध वेबसाइटों और डिजिटल माध्यमों की निगरानी कर रही थी। इसी दौरान सामने आया कि एक संगठित साइबर गिरोह फर्जी फेसबुक पेज, इंस्टाग्राम अकाउंट, व्हाट्सएप नंबर और बैंक खातों के माध्यम से श्रद्धालुओं को हेलीकॉप्टर सेवा बुकिंग का झांसा देकर ठगी कर रहा है। मामले में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
तकनीकी साक्ष्यों, बैंकिंग ट्रेल और मोबाइल डेटा के आधार पर एसटीएफ टीम ने बिहार में एक सप्ताह तक लगातार अभियान चलाया। इसके बाद नालंदा जिले से गिरोह के दो मुख्य सदस्यों दीपक कुमार निवासी बिहार शरीफ व विजित कुमार उर्फ मिकी निवासी शेखपुरा को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता को फर्जी हेली टिकट उपलब्ध कराए थे, जिसके आधार पर मुकदमे में अतिरिक्त धाराएं भी बढ़ाई गई हैं।
विवेचना के दौरान एसटीएफ को गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) व बिहार पुलिस से भी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं। इसी क्रम में नालंदा के एक अन्य साइबर अपराधी शिव कुमार पासवान उर्फ फुलटून का नाम भी सामने आया, जो बिहार में दर्ज साइबर धोखाधड़ी के एक मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। पूछताछ में उसके उत्तराखंड में संचालित हेली सेवा धोखाधड़ी से जुड़े होने के भी साक्ष्य मिले हैं, जिसके संबंध में वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
ऐसे करते थे ठगी…..
जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को अधिकृत हेली सेवा प्रदाता या एजेंट बताकर फर्जी सोशल मीडिया पेज और वेबसाइट संचालित करते थे। श्रद्धालुओं को “वीआईपी दर्शन”, “तुरंत कन्फर्म टिकट” और “सीमित सीट” जैसे आकर्षक ऑफर देकर जाल में फंसाया जाता था। ठगी की रकम विभिन्न व्यक्तियों के बैंक खातों में मंगवाई जाती थी, जिन्हें म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। बाद में एटीएम के जरिए नकदी निकालकर गिरोह के सदस्यों में 15 से 25 प्रतिशत तक कमीशन बांटा जाता था।
नाबालिगों की संलिप्तता ने बढ़ाई चिंता…..
बिहार में कार्रवाई के दौरान एसटीएफ ने कुछ नाबालिगों से भी पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि साइबर अपराधी कम उम्र के किशोरों को भी इस तरह की धोखाधड़ी में शामिल कर रहे हैं। पूछताछ में यह तथ्य भी सामने आया कि कई बार अपराधी अनजान लोगों के मोबाइल हॉटस्पॉट और इंटरनेट कनेक्शन का उपयोग कर अपनी पहचान छिपाने का प्रयास करते हैं। इस संबंध में विस्तृत जांच जारी है।
एनसीआरपी शिकायतों से जुड़े मिले खाते…..
गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े बैंक खातों पर नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) में कई शिकायतें दर्ज पाई गईं। व्हाट्सएप चैट में बैंक खातों, एटीएम कार्ड और क्यूआर कोड के आदान-प्रदान से जुड़े अहम साक्ष्य भी मिले हैं। जांच में गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ पाया गया है। एसटीएफ टीम ने आरोपियों के कब्जे से पांच बैंक पासबुक, एक चेकबुक, दो मोबाइल फोन, एक एटीएम कार्ड, दो सिम संबंधी सामग्री, एक आधार कार्ड, एक पैन कार्ड तथा अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं।
एसएसपी एसटीएफ की अपील…..
एसएसपी एसटीएफ ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि चारधाम यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर बुकिंग केवल अधिकृत पोर्टल के माध्यम से ही करें। किसी भी अज्ञात व्हाट्सएप नंबर, सोशल मीडिया लिंक अथवा संदिग्ध वेबसाइट के जरिए भुगतान न करें। “जल्दी टिकट” या “वीआईपी पास” जैसे प्रलोभनों से बचें तथा साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन नंबर या निकटतम साइबर थाने से संपर्क करें। कार्रवाई करने वाली एसटीएफ टीम में निरीक्षक एन.के. भट्ट, उपनिरीक्षक राजीव सेमवाल, हेड कांस्टेबल अनूप भाटी, कांस्टेबल नितिन रमोला तथा कांस्टेबल कादर शामिल रहे।



