“इन्वेस्टर्स समिट के दावों की परतें खोलेगा सुराज सेवादल, शासन और सिडकुल के अधिकारियों से मंगलवार को लेंगे हिसाब..
रमेश जोशी के सवाल, मुख्यमंत्री धामी के हजारों करोड़ के निवेश के दावे आखिर धरातल पर कहां उतरे? अधिकारी बताएं कितने उद्योग लगे और कितने उत्तराखंडी युवाओं को मिला रोजगार..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार। उत्तराखंड में निवेश और रोजगार को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बड़े-बड़े दावों के बीच अब सवाल सरकार के साथ-साथ शासन और सिडकुल के अधिकारियों की कार्यशैली पर भी उठने लगे हैं। सुराज सेवादल के अध्यक्ष रमेश जोशी ने सीधे सवाल किया है कि इन्वेस्टर्स समिट में करोड़ों रुपये खर्च करने, हजारों करोड़ के निवेश के दावे करने और उद्योगपतियों से एमओयू कराने के बाद आखिर हासिल क्या हुआ? यदि निवेश धरातल पर उतरा है तो शासन में बैठे अधिकारी सामने आकर बताएं कि कितने उद्योग लगे, कितना वास्तविक निवेश आया और कितने उत्तराखंडी युवाओं को रोजगार मिला।
रमेश जोशी ने आरोप लगाया कि इन्वेस्टर्स समिट के नाम पर जनता के खून-पसीने की कमाई का करोड़ों रुपये खर्च किया गया। उस समय हजारों करोड़ रुपये के निवेश के दावे किए गए, लेकिन अब उन दावों का हिसाब देने की बारी है। उन्होंने सवाल किया कि समिट में किए गए दावों की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी? जिन अधिकारियों की अगुवाई में इतना बड़ा आयोजन हुआ, क्या उनसे कभी पूछा गया कि निवेश के कितने प्रस्ताव जमीन पर उतरे?
उन्होंने कहा कि मंगलवार को सुराज सेवादल आईटी पार्क स्थित सिडकुल कार्यालय में धरना-प्रदर्शन करेगा। संगठन उद्योगों के आवंटन, ट्रांसफर और उनसे जुड़े दस्तावेज लेकर अधिकारियों से जवाब मांगेगा। सवाल यह होगा कि सिडकुल के पास उत्तराखंड के औद्योगिक विकास और युवाओं को रोजगार देने की आखिर क्या योजना है। जोशी ने सिडकुल अधिकारियों की कार्यशैली पर भी तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोजगार पैदा करने के लिए इतना बड़ा सरकारी तंत्र और भारी-भरकम स्टाफ मौजूद है, लेकिन उत्तराखंड का युवा आज भी एक अदद नौकरी के लिए दूसरे राज्यों में धक्के खाने को मजबूर है। आखिर सिडकुल के अधिकारी अपने दफ्तरों में बैठकर ऐसा कौन सा इतिहास रच रहे हैं, जिसका रोजगार के मोर्चे पर कोई परिणाम दिखाई नहीं देता? उन्होंने कहा कि यदि उद्योगों के लिए जमीन और सरकारी संसाधन उपलब्ध कराने के बावजूद रोजगार नहीं बढ़ रहा तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री के निर्देशों और सरकार के दावों का असर जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा, इसका जवाब शासन और सिडकुल के जिम्मेदार अधिकारियों को देना होगा। जोशी ने कहा कि मंगलवार को धरने के दौरान केवल आश्वासन नहीं, बल्कि निवेश, उद्योगों और रोजगार का पूरा हिसाब मांगा जाएगा। जनता के पैसे से हुए खर्च और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों का जवाब देना सरकार और अधिकारियों की जिम्मेदारी है।



