दरगाह साबिर पाक में हुड़दंग का ‘रॉकेट’ आस्था के आंगन में शर्मनाक करतूत, वीडियो हो रहा वायरल..
वुजू कर रहे जायरीन के पास जाकर फटा रॉकेट हुआ धमाका, सुरक्षा और आस्था पर प्रश्नचिन्ह..
पंच👊नामा
पिरान कलियर: विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक में हुड़दंगइयों द्वारा पटाखे छोड़कर उत्पात मचाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हैरत की बात यह है कि यह सब दरगाह के पैताने जैसे संवेदनशील हिस्से में हुआ, जहां एक रॉकेट पटाखा वुजू कर रहे एक जायरीन के बेहद करीब जाकर फट गया। गनीमत रही कि हादसा टल गया, लेकिन इस घटना ने आस्था और सुरक्षा—दोनों व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दरगाह परिसर के पास कुछ लोगों ने न रॉकेट जैसी खतरनाक आतिशबाजी की, जिसका एक वीडियो, अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, उसमें साफ देखा जा सकता है कि एक जायरीन वुजूखाने पर इबादत के लिए वुजू करने में मशगूल था, तभी अचानक छोड़ा गया रॉकेट उसके बेहद करीब आकर फटता है।
इस दौरान कुछ क्षणों के लिए अफरा-तफरी मच गई, लेकिन हैरानी की पराकाष्ठा तब दिखी जब इस खतरनाक हरकत के बाद ये दुस्साहसी ठहाके लगाते नजर आए—मानो किसी हादसे का इंतजार कर रहे हों। गौरतलब करने वाली बात ये है कि अगर यही रॉकेट दरगाह परिसर के भीतर, जहां महिलाएं, बच्चे और सैकड़ो जायरीन मौजूद रहते हैं, जाकर फटता, तो स्थिति भयावह हो सकती थी।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी संवेदनशील धार्मिक स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था किसके भरोसे छोड़ी गई है? दरगाह की प्रबंधन व्यवस्था जिला प्रशासन के अधीन होने के बावजूद इस तरह की घटनाएं होना, जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने जैसा प्रतीत होता है।
क्या दरगाह परिसर अब अराजक तत्वों के लिए ‘खुला मैदान’ बन चुका है? क्या प्रशासन केवल वीडियो वायरल होने के बाद ही जागेगा? या फिर हर बार की तरह यह मामला भी ‘जांच के नाम पर ठंडे बस्ते’ में डाल दिया जाएगा?
यह पहला मामला नहीं है जब दरगाह परिसर से अव्यवस्था की तस्वीरें सामने आई हों। आए दिन मारपीट और हुड़दंग के वीडियो वायरल होना, सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है। लाखों अकीदतमंदों की आस्था का केंद्र यह दरगाह, जहां लोग सुकून और रूहानी राहत की तलाश में आते हैं, वहां इस तरह की घटनाएं न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की भी गवाही देती हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या दरगाह प्रबंधन और जिला प्रशासन इस घटना को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई करेंगे, या फिर यह मामला भी वक्त की गर्दिश में गुम होकर अगली किसी ‘वायरल घटना’ का इंतजार करेगा…?
जिम्मेदार लोगों को चाहिए कि वे दरगाह की पवित्रता और यहां की व्यवस्थाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखें, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू करें। जो लोग यहां की मामलात और अदब-कायदे से अनजान हैं,
उन्हें समझाना भी जरूरी है और जो जानबूझकर हुड़दंग करते हैं, उन्हें कानून का सख्त सबक सिखाना भी उतना ही अहम है। आखिर आस्था के इस मुकाम पर लापरवाही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और अनुशासन ही सबसे बड़ा फर्ज है।



