“बड़े जिले में एसएसआई का प्रोडक्शन धीमा, बाहर से हो रहे इम्पोर्ट, चौकी प्रभारी “ओवर फ्लो, कीमतों में गिरावट..
ईरान-इजरायल युद्ध का असर, पुलिस में "एलपीजी नहीं, "एसएसआई का संकट, नये स्टॉक की आपूर्ति जल्द..
पंच👊नामा
सुल्तान, उत्तराखंड ब्यूरो: ईरान-इजरायल व अमेरिकी युद्ध ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। कितने ही मुल्क पेट्रोल-डीजल के संकट से गुजर रहे हैं, दुनिया की बड़ी आबादी वाला हमारा देश भारत एलपीजी संकट से जूझ रहा है। उद्योगों का उत्पादन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
बड़े देश और एलपीजी संकट से याद आया कि एक बड़े जिले में इन दिनों पता नहीं क्यों “एसएसआई मतलब वरिष्ठ उपनिरीक्षकों का प्रोडक्शन धीमा हो गया है। यूं कहें कि प्रोडक्शन बंद सा हो गया है।
पहले से जो माल तैयार है, बस वही मार्केट में है। ऐसे में बाहर के जिलों से एसएसआई इम्पोर्ट करने पड़ रहे हैं। “होरमुज़ से निकलते जहाज की तरह एक खेप जिले में पहुंच चुकी है। जिससे थोड़ी राहत मिली है।
“पंच👊नामा… के अंडर-कवर खबरी “लल्लन पांडे” का तो यहां तक दावा है कि एक और नया स्टॉक रवानगी की तैयारी में है, ये फिलहाल होरमुज़ से थोड़ा पीछे है, लेकिन इसकी आपूर्ति खाड़ी देशों से नहीं, बल्कि पहाड़ी जिलों के रास्ते होने की संभावनाएं बनी हुई हैं।
खैर प्रोडक्शन से जुड़ी एक और अपडेट है कि जिले में चौकी प्रभारियों की कोई कमी नहीं है। बल्कि ओवर फ्लो हो रहा है। अर्थशास्त्र का “मांग और आपूर्ति” का सिद्धांत ये कहता है कि जब मांग ज्यादा और आपूर्ति कम हो तो कीमत बढ़ती है।
मगर आपूर्ति ज्यादा और मांग कम हो तो कीमत घटती है। इस थ्योरी को पुलिस के नजरिये से देखें तो कोतवालियों की संख्या बढ़ने से एसएसआई की मांग ज़्यादा और आपूर्ति कम है, जबकि चौकी प्रभारियों की आपूर्ति कुल मांग से ज़्यादा है। कुल मिलाकर युद्ध ने सब उलट-पुलट कर रख दिया है।



