
पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन निर्वाण के महामंडलेश्वर करौली शंकर दास पर आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है।
खास बात यह है कि विवाद के केंद्र में हरिद्वार का ही एक यू-ट्यूबर गौतम खट्टर है, जिसके खिलाफ कानपुर में मुकदमा दर्ज होने के बाद अब हरिद्वार में ही उसकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई है। संत समाज साफ तौर पर कह रहा है कि आरोपी स्थानीय है, इसलिए कार्रवाई भी यहीं से दिखनी चाहिए।
कनखल स्थित अखाड़े में हुई आपात बैठक में संतों का गुस्सा खुलकर सामने आया। संतों ने एक स्वर में कहा कि यह मामला सिर्फ एक संत के सम्मान का नहीं, बल्कि पूरे संत समाज और सनातन परंपरा की गरिमा से जुड़ा है। बैठक में यह भी कहा गया कि हरिद्वार धर्मनगरी है और यहां से जुड़े व्यक्ति द्वारा इस तरह की टिप्पणी करना और भी गंभीर है। संतों ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जल्द ही हरिद्वार से ही आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो संत समाज सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगा।
अखाड़े के मुखिया महंत भगत राम ने कहा कि करौली शंकर दास महाराज वर्षों से योग, साधना और सेवा के जरिए समाज को दिशा दे रहे हैं। ऐसे संत पर टिप्पणी करना केवल व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था पर चोट है। सचिव जगतार मुनि महाराज ने इसे सुनियोजित दुष्प्रचार करार देते हुए कहा कि सोशल मीडिया के जरिए संतों की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रमुख सेवादार नितिन दास ने दो टूक कहा कि अखाड़े की परंपरा और संतों के सम्मान से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।
पूरा विवाद आठ अप्रैल को दर्ज उस शिकायत से जुड़ा है, जिसमें करौली शंकर दास की शिष्या प्रियंका द्विवेदी ने कानपुर के साइबर क्राइम थाने में गौतम खट्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि यू-ट्यूबर ने पट्टाभिषेक से जुड़े एक वीडियो में अशोभनीय टिप्पणियां कीं और ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जिससे धार्मिक भावनाएं भड़क सकती हैं। संत समाज का कहना है कि वीडियो के जरिए न सिर्फ छवि धूमिल की गई, बल्कि समाज में तनाव फैलाने की कोशिश भी की गई।
अब संतों का साफ रुख है कि मामला सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं रहना चाहिए। आरोपी हरिद्वार का है, इसलिए गिरफ्तारी भी हरिद्वार से होनी चाहिए। संत समाज की इस मांग के बाद स्थानीय पुलिस पर दबाव बढ़ गया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।



