“अवैध खनन ही नहीं, अवैध कॉलोनी के धंधे में भी किसान यूनियन, 140 बीघा अवैध कॉलोनी पर लगाया अपना बोर्ड..
एचआरडीए ने खींचे हाथ, किसान राजनीति की आड़ में अवैध धंधों को सरंक्षण देने वाली प्राइवेट कंपनी बनी यूनियन, प्रशासनिक कार्यशैली पर भी सवाल..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: जनपद में अवैध कॉलोनियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई के दावों के बीच भगवानपुर क्षेत्र में तेलपुरा के बुग्गावाला मार्ग पर 140 बीघा बाग व खेती की जमीन पर अवैध कॉलोनी उगा दी गई। एचआरडीए ने नोटिस जारी किया तो किसान यूनियन का एक गुट बचाव में कूद पड़ा। लेकिन असली खेल इसके बाद शुरू हुआ।
किसान हित की राजनीति का ढिंढोरा पीटने वाली यूनियन ने कॉलोनी में अपना होर्डिंग लगाकर अवैध को वैध साबित करने का कुचक्र चल डाला। लेकिन ये सब मुफ्त में नहीं हुआ। क्षेत्र में ऐसी चर्चाएं हैं कि देहरादून के बिल्डर से यूनियन सांठगांठ कर अपना हिस्सा तय कर डाला। अन्यथा कहां किसान यूनियन और कहां करोड़ों की अवैध कॉलोनी का धंधा।
ये भी बताया गया है अवैध कॉलोनी उगाने के लिए बाग के अनगिनत पेड़ों को हलाल किया गया है। कुल मिलाकर हरिद्वार देहात क्षेत्र में किसान यूनियन के कुछ गुट किसान हितों के आवाज़ उठाने के बजाय अवैध धंधों को सरंक्षण देने की प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनकर रह गए हैं।
एक तरफ यही गुट अवैध खनन चलाने के लिए अधिकारियों पर दबाब डालने की चालें चल रहा है। दूसरी तरफ अवैध कॉलोनी के लिए ढाल बनकर खड़ा हो गया है। ऐसे में सवाल हरिद्वार के जिला प्रशासन और एचआरडीए की कार्यशैली को लेकर भी उठ रहे हैं।
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क्यों रुक गए बुल्डोजर के पहिये..??
खनन बंदी के बीच चल रहे क्रशर और खनन सामग्री ढोने वाले ओवरलोड गाड़ियों, ट्रैक्टर ट्रॉली पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। दूसरी तरफ अवैध कॉलोनी को तोड़ने का नोटिस जारी कर एचआरडीए गहरी नींद में क्यों सो गया।
छोटे-छोटे निर्माण को अवैध बताकर तोड़ने वाला एचआरडीए का बुल्डोजर तथाकथित किसान यूनियन का होर्डिंग देखकर क्यों थम गया। क्षेत्र में सबकी नजरें जिलाधिकारी और एचआरडीए उपाध्यक्ष की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।



