“हरिद्वार: अवैध निर्माण पर कार्रवाई से गरमाया माहौल, भाजपा नेता और प्राधिकरण आमने-सामने..
एचआरडीए की दो टूक, अवैध निर्माण किसी का भी हो, नियमानुसार होगी कार्रवाई

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: हरकी पैड़ी और कुशावर्त घाट के आसपास गंगा किनारे अवैध निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अखाड़े की भूमि पर कथित तौर पर किए जा रहे व्यावसायिक निर्माण के खिलाफ हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) की कार्रवाई से नाराज भाजपा मंडल अध्यक्ष किशन बजाज ने प्राधिकरण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने प्राधिकरण कार्यालय पहुंचकर समर्थकों के साथ प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
कुशावर्त घाट के पास स्थित अखाड़े की संपत्ति पर व्यावसायिक निर्माण कराया जा रहा था। शिकायतों के बाद एचआरडीए की टीम मौके पर पहुंची और निर्माण को अवैध पाते हुए सील कर दिया। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई एक-दो नहीं, बल्कि दो से तीन बार की गई। इसके बावजूद निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर दिए जाने का मामला सामने आया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सील तोड़कर निर्माण जारी रखने के आरोप भी लगे, जिसके बाद प्राधिकरण ने सख्ती दिखाते हुए दोबारा सीलिंग की और संबंधित के खिलाफ नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया।
प्राधिकरण का कहना है कि गंगा किनारे एनजीटी के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर निर्माण कार्य किया जा रहा था, जो नियमों के विपरीत है। सहायक अभियंता प्रशांत सेमवाल ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण के दौरान निर्माण अवैध पाया गया था। निर्माणकर्ता को कई बार नोटिस देकर और मौखिक रूप से भी चेतावनी दी गई कि बिना मानचित्र स्वीकृति के कार्य न किया जाए, लेकिन इसके बावजूद काम जारी रहा। उन्होंने बताया कि 1 नवंबर 2025 को निर्माण को सील किया गया था, लेकिन बाद में सूचना मिली कि सील को क्षतिग्रस्त कर हटा दिया गया है। इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
वहीं, भाजपा मंडल अध्यक्ष किशन बजाज प्राधिकरण की कार्रवाई को गलत बताते हुए लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि प्राधिकरण की कार्रवाई पक्षपातपूर्ण है। हालांकि, प्राधिकरण अधिकारियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि पूरी कार्रवाई नियमानुसार और प्रक्रिया के तहत की गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि नियम सभी के लिए समान हैं, तो फिर अवैध निर्माण पर कार्रवाई का विरोध क्यों किया जा रहा है। गंगा तट जैसे संवेदनशील क्षेत्र में एनजीटी के नियमों की अनदेखी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल, मामला राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। एक ओर प्राधिकरण अपनी कार्रवाई को सही ठहरा रहा है, वहीं दूसरी ओर भाजपा नेता का विरोध जारी है। ऐसे में प्रशासन के सामने कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ नियमों का सख्ती से पालन कराना भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।



