“वन विकास निगम में टेंडर घोटाले के आरोप, ठेकेदारों ने डीएम से की जांच की मांग, आंदोलन की चेतावनी..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार; वन विकास निगम के लॉगिंग प्रभाग हरिद्वार में कथित टेंडर घोटाले को लेकर विवाद गहराने लगा है। हरिद्वार प्रभाग के पंजीकृत ठेकेदारों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि जनवरी 2026 से अब तक कई कार्य निर्धारित नियमों को दरकिनार कर कराए गए। चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।
ज्ञापन के अनुसार एक जनवरी 2026 से अब तक कई विकास व वानिकी कार्यों में खुली प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि कई टेंडरों की सूचना विभागीय वेबसाइट, ई-टेंडरिंग पोर्टल या व्यापक प्रसार वाले समाचार पत्रों में समय पर प्रकाशित नहीं की गई। इससे बड़ी संख्या में पंजीकृत ठेकेदार निविदा प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित रह गए।
ठेकेदारों का आरोप है कि पांच लाख रुपये से अधिक लागत वाले कई कार्य भी बिना सार्वजनिक निविदा के चुनिंदा फर्मों को आवंटित कर दिए गए। वर्क ऑर्डर जारी करने और भुगतान प्रक्रिया में भी पारदर्शिता नहीं बरती गई। इससे सरकारी धन के उपयोग और खरीद प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ज्ञापन में अजनी-चौड़, श्यामपुर व चिड़ियापुर-पथरी वन क्षेत्रों में बहुमूल्य वृक्षों के कथित कटान और ढुलान का मामला भी उठाया गया है। ठेकेदारों ने इन क्षेत्रों में हुए कार्यों की स्वीकृतियों, मापन पुस्तिकाओं, परिवहन अभिलेखों और अन्य रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सभी कार्य नियमानुसार हुए या नहीं।
ठेकेदारों ने जनवरी 2026 से अब तक जारी सभी टेंडरों, कार्य आवंटनों, बिना टेंडर दिए गए कार्यों, वर्क ऑर्डर, भुगतान, बिलों और विभागीय अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है। साथ ही वन क्षेत्रों में वृक्ष कटान और ढुलान का संयुक्त भौतिक सत्यापन कराने की भी मांग उठाई है।
इससे पहले सुराज सेवादल के अध्यक्ष रमेश जोशी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने देहरादून स्थित वन विकास निगम के महाप्रबंधक कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया था। तब भी कथित टेंडर घोटाले की जांच की मांग उठाई गई थी। ठेकेदारों का आरोप है कि विरोध के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि इस बार भी मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।



