“धनौरी हादसे ने फिर उठाया पुलिस आवास का सवाल, विभागीय क्वार्टर कम, हरिद्वार में पुलिसकर्मियों के परिवार भेल और सिंचाई विभाग के भरोसे..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार/रुड़की; पुलिस की वर्दी पहनकर जनता की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले जवानों के अपने परिवारों के लिए सुरक्षित छत का संकट बरकरार है। धनौरी के अमृत लॉ कॉलेज में भवन का हिस्सा गिरने से पीएसी जवान मोहम्मद आदिल की मौत ने ड्यूटी के दौरान जवानों की सुरक्षा का सवाल तो खड़ा किया ही है,
साथ ही पुलिसकर्मियों के आवास की पुरानी समस्या को भी फिर सामने ला दिया है। जिले में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के लिए विभागीय आवास पर्याप्त नहीं हैं। नतीजा यह कि कई पुलिसकर्मियों के परिवार भेल टाउनशिप और सिंचाई विभाग के आवासों में रहने को मजबूर हैं।
विडंबना यह है कि पुलिस महकमा हर दिन कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालता है, लेकिन अपने ही जवानों के लिए पर्याप्त आवासीय व्यवस्था नहीं कर पाया है। जवानों की ड्यूटी का कोई तय समय नहीं होता। रात-दिन की ड्यूटी, अचानक बुलावा, त्योहारों और वीआइपी कार्यक्रमों में अतिरिक्त जिम्मेदारी के बीच पुलिसकर्मियों का अपने तैनाती स्थल के आसपास रहना जरूरी होता है। इसके बावजूद विभागीय आवासों की कमी के कारण उन्हें निजी मकान या दूसरे सरकारी विभागों के आवासों का सहारा लेना पड़ता है।
परिवार दूसरे विभागों के आवासों में….
हरिद्वार और रुड़की में कई पुलिसकर्मियों के परिवार भेल टाउनशिप और सिंचाई विभाग के आवासों में रह रहे हैं। इन आवासों की उपलब्धता पुलिस विभाग के नियंत्रण में नहीं है। ऐसे में तबादले, आवास खाली करने की प्रक्रिया या दूसरी विभागीय जरूरतों के सामने पुलिसकर्मियों के परिवारों के सामने नया ठिकाना तलाशने की चुनौती खड़ी हो जाती है।
यह स्थिति सिर्फ सुविधा का मामला नहीं है। पर्याप्त विभागीय आवास नहीं होने का सीधा असर पुलिसकर्मी के पारिवारिक जीवन और ड्यूटी दोनों पर पड़ता है। कई बार जवान को कार्यस्थल के आसपास किराये का मकान लेना पड़ता है। किराये और आवागमन का अतिरिक्त बोझ अलग है।
पीएसी के लिए अस्थायी ठिकाने, सवाल स्थायी व्यवस्था का…
धनौरी में पीएसी जवानों के ठहरने के दौरान हुआ हादसा इस सवाल को भी सामने लाता है कि जवानों को अस्थायी रूप से ठहराने वाले भवनों की सुरक्षा जांच कितनी गंभीरता से होती है। पीएसी और पुलिस के जवानों को अलग-अलग अभियानों और ड्यूटी के लिए लगातार इधर-उधर तैनात किया जाता है। ऐसे में उनके लिए सुरक्षित बैरक और आवासीय सुविधाएं बेहद जरूरी हैं।
मोहम्मद आदिल छुट्टी से लौटकर ड्यूटी पर आया था। ड्यूटी संभालने के कुछ ही समय बाद मलबे में दबकर उसकी मौत हो गई। हादसे की जांच अपने स्तर पर होगी और भवन गिरने के कारण भी सामने आएंगे, लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल छोड़ दिया है—जब पुलिसकर्मी दूसरों के घरों में परिवार बसा रहे हों और ड्यूटी के लिए अस्थायी ठिकानों पर निर्भर हों, तो उनके लिए स्थायी और सुरक्षित आवास की व्यवस्था कब होगी? शहर की सुरक्षा करने वाली खाकी के लिए सबसे जरूरी सुरक्षा आखिर उसकी अपनी छत ही है।



