
पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार। किशोरी के अपहरण के मामले में जेल जाने से बचने के लिए आरोपी ने खुद को नाबालिग साबित करने का दांव चला, लेकिन पुलिस की जांच में पूरा फर्जीवाड़ा खुल गया। आरोपी ने मेरठ के एक निजी कॉलेज की कक्षा आठ की टीसी पेश कर खुद को नाबालिग बताया और किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
पुलिस ने टीसी का सत्यापन कराया तो कॉलेज ने उसे फर्जी बता दिया। इसके बाद दूसरे शैक्षिक रिकॉर्ड से आरोपी की असली जन्मतिथि सामने आ गई। घटना के समय उम्र 18 वर्ष पूरी होने की पुष्टि के बाद उसे बाल सुधार गृह से जिला कारागार भेज दिया गया। वहीं, फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और उसका इस्तेमाल करने के आरोप में आरोपी और उसके परिजन के खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज किया गया है।
मामला सिडकुल क्षेत्र के रोशनाबाद का है। यहां एक किशोरी के अपहरण के मामले में पुलिस ने सीताबपुरी, मुजफ्फरनगर निवासी विशाल कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। मामले की जांच उपनिरीक्षक मनीषा जोशी को सौंपी गई थी। जांच के दौरान विशाल ने घटना के समय अपनी उम्र कम साबित करने के लिए सनबीम इंटर कॉलेज, अब्दुल्लापुर मेरठ की कक्षा आठ की टीसी पुलिस के समक्ष पेश की।
टीसी के आधार पर विशाल ने किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। न्यायालय ने उसे न्यायिक सुरक्षा अभिरक्षा में लेकर प्लेस ऑफ सेफ्टी भेज दिया। हालांकि पुलिस ने दस्तावेज का सत्यापन कराया तो संबंधित कॉलेज ने टीसी को फर्जी बता दिया। इसके बाद पुलिस ने स्वामी कल्याणदेव इंटरमीडिएट कॉलेज के रिकॉर्ड की जांच की। इसमें विशाल की जन्मतिथि 15 मार्च 2008 दर्ज मिली।
इस रिकॉर्ड के आधार पर घटना के समय विशाल की उम्र 18 वर्ष पूरी हो चुकी थी। पुलिस ने यह तथ्य न्यायालय के समक्ष रखा, जिसके बाद आरोपी को बाल सुधार गृह से जिला कारागार भेज दिया गया। यानी नाबालिग बनकर बाल सुधार गृह पहुंचा आरोपी अब जेल पहुंच चुका है। सिडकुल थाना प्रभारी अजय शाह ने बताया कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे असली के रूप में इस्तेमाल करने के आरोप में विशाल और उसके परिजन के खिलाफ अलग मुकदमा दर्ज किया गया है। न्यायालय के आदेश पर आरोपी को जिला कारागार भेज दिया गया है।



