“अर्द्धकुंभ की तैयारियों पर यूपी सिंचाई विभाग ने फेरा “पानी”, गंग नहर में डबल पानी छोड़ने से डूबे निर्माणाधीन घाट, मचा हड़कंप..
करीब 12 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने से ऋषिकुल पुल से ज्वालापुर तक निर्माणाधीन घाटों पर पहुंचा पानी, नवंबर तक पूरे होने हैं निर्माण कार्य; यूपी सिंचाई विभाग और अर्द्धकुंभ मेला अधिष्ठान के बीच समन्वय पर सवाल, (देखें वीडियो)..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार; अर्द्धकुंभ की तैयारियों के बीच बुधवार सुबह उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से गंग नहर में अचानक बढ़ी पानी की मात्रा ने निर्माणाधीन घाटों की तैयारियों को झटका दे दिया। विभाग ने सुबह करीब 12 हजार क्यूसेक पानी गंग नहर में छोड़ दिया।
सामान्य तौर पर करीब पांच से साढ़े पांच हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने की स्थिति में यह मात्रा लगभग दोगुनी है। पानी बढ़ते ही ऋषिकुल पुल के आसपास के निर्माणाधीन घाटों से लेकर ज्वालापुर तक कई घाटों पर पानी पहुंच गया। इससे निर्माण कार्यों को लेकर हड़कंप की स्थिति पैदा हो गई और नवंबर तक काम पूरा करने की समयसीमा पर भी सवाल खड़े हो गए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अर्द्धकुंभ के निर्माण कार्य पहले से युद्धस्तर पर चल रहे हैं और नवंबर तक इन्हें पूरा किया जाना है, तो फिर अचानक गंग नहर में करीब दोगुना पानी क्यों छोड़ा गया? क्या उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग को ऋषिकुल से ज्वालापुर तक चल रहे निर्माण कार्यों की जानकारी नहीं थी? यदि जानकारी थी तो पानी छोड़ने से पहले अर्द्धकुंभ मेला अधिष्ठान और निर्माण एजेंसियों को सतर्क क्यों नहीं किया गया?
निर्माण एक तरफ, पानी दूसरी तरफ….
अर्द्धकुंभ की तैयारियों को लेकर उत्तराखंड के संबंधित विभाग निर्माण कार्यों को तेजी से पूरा कराने में जुटे हैं। ऋषिकुल पुल से ज्वालापुर तक घाटों का निर्माण चल रहा है। ऐसे में गंग नहर में अचानक बढ़ा पानी विभागों के बीच समन्वय की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
यदि पानी छोड़ने का कार्यक्रम पहले से तय था तो संबंधित अधिकारियों के बीच तालमेल क्यों नहीं हुआ? और यदि पानी अचानक बढ़ाया गया तो इतने बड़े आयोजन की तैयारियों के बीच इसकी जानकारी संबंधित महकमों को क्यों नहीं दी गई?
निर्माणाधीन घाटों पर पानी पहुंचने से निर्माण सामग्री की सुरक्षा से लेकर काम की गति तक प्रभावित होने की आशंका है। यदि पानी के कारण निर्माण कार्य रुकते हैं तो साइट को दोबारा तैयार करने और प्रभावित हिस्सों में काम शुरू करने में अतिरिक्त समय लग सकता है।
नवंबर की डेडलाइन पर बढ़ा दबाव…..
अर्द्धकुंभ के निर्माण कार्यों को नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में ऋषिकुल से ज्वालापुर तक निर्माणाधीन घाटों पर पानी पहुंचना महज एक दिन की परेशानी नहीं है। निर्माण की रफ्तार प्रभावित हुई तो इसका सीधा असर पूरी समयसीमा पर पड़ सकता है। एक तरफ निर्माण एजेंसियां समय से काम पूरा करने के लिए दिन-रात जुटी हैं, दूसरी तरफ अचानक बढ़ा पानी उनकी तैयारियों पर पानी फेर सकता है।
बुधवार की घटना ने यूपी सिंचाई विभाग और अर्द्धकुंभ मेला अधिष्ठान के बीच समन्वय को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल यह भी है कि जब ऋषिकुल पुल से ज्वालापुर तक निर्माणाधीन घाटों पर काम चल रहा है तो पानी छोड़ने से पहले दोनों विभागों के बीच समन्वय क्यों नहीं किया गया?
अर्द्धकुंभ जैसे बड़े आयोजन की तैयारियों में यदि विभागों के बीच तालमेल का यही हाल रहा तो निर्माण कार्यों को तय समय में पूरा कराना चुनौती बन सकता है। अब सवाल पानी छोड़ने से आगे बढ़कर जवाबदेही का है—करीब दोगुना पानी छोड़ने का फैसला किस आधार पर लिया गया और निर्माणाधीन घाटों की सुरक्षा को लेकर पहले से क्या तैयारी की गई थी?



