“पिरान कलियर में कैमरों की ‘तीसरी आंख’ निकली अंधी, मासूम से दरिंदगी के बाद पुलिस गलियों की खाक छानने पर मजबूर..
कहीं CCTV बंद, कहीं कैमरे ही नहीं; रैनबसेरा भी निगरानी से बाहर, 100 से ज्यादा कैमरे खंगालने के बाद भी आरोपी का सुराग नहीं, दरगाह प्रबंधन और नगरपंचायत की कार्यशैली पर भी उठे सवाल..

पंच👊नामा
पिरान कलियर; छह साल की मासूम के साथ हुई दरिंदगी को 24 घंटे से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है, पुलिस की आधा दर्जन से ज्यादा टीमें रेत में सुई तलाशने की तरह इलाके की खाक छान रही हैं, संदिग्धों से पूछताछ हो रही है, पुराने आरोपियों से लेकर बाहरी लोगों तक का सत्यापन किया जा रहा है और 100 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा चुकी है। दूसरी तरफ पिरान कलियर की जिस ‘तीसरी आंख’ से अपराधियों पर नजर रखने का दावा किया जाता है, वही आंख कई जगह बंद पड़ी नजर आ रही है, जिसने पुलिस की राह को और जटिल बनाया हुआ है।
मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पिरान कलियर की सुरक्षा व्यवस्था और CCTV निगरानी तंत्र पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण पिरान कलियर में देश-विदेश से जायरीन पहुंचते हैं। दरगाह साबिर पाक में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। ऐसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में मजबूत निगरानी व्यवस्था को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, लेकिन घटना के बाद सामने आई तस्वीरें व्यवस्था की कई कमजोर कड़ियों की ओर इशारा कर रही हैं।
दरगाह क्षेत्र में CCTV निगरानी व्यवस्था पर लाखों रुपये खर्च किए जाने की बातें सामने आती रही हैं। मुख्य चौराहों और महत्वपूर्ण स्थानों पर कैमरे लगाए गए हैं, लेकिन सवाल यह है कि जब किसी वारदात के बाद पुलिस को इन्हीं कैमरों की जरूरत पड़ती है ये शोपीस नजर आते है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जिस निगरानी व्यवस्था को अपराध रोकने और अपराधियों तक पहुंचने का सबसे मजबूत माध्यम माना जाता है,
उसकी नियमित मॉनिटरिंग कौन करता है? कैमरे लगाए जाने के बाद उनकी तकनीकी जांच और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है? और अगर कोई कैमरा महीनों से बंद पड़ा है तो इसकी जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंची? विडंबना यह है कि कैमरे लगे होने के बावजूद अगर अपराध के बाद पुलिस को गलियों और रास्तों की धूल फांकनी पड़े तो फिर इन्हें ‘तीसरी आंख’ कहना भी शायद तीसरी आंख का अपमान ही होगा।
मासूम के साथ हुई घटना ने रैनबसेरे की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस रैनबसेरे का उद्देश्य जायरीनों और जरूरतमंदों को सुविधा उपलब्ध कराना होना चाहिए, वहां असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों के जमावड़े की शिकायतें सामने आती रही हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि रैनबसेरे और उसके आसपास CCTV निगरानी का पर्याप्त इंतजाम नहीं है।
ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि इतने संवेदनशील स्थान पर आने-जाने वालों की निगरानी आखिर कैसे की जा रही है? कलियर में बाहर से आने वाले कई लोग लंबे समय तक यहां ठहरते हैं। कुछ लोग महीनों तो कुछ वर्षों से यहां जमे हुए है। मुफ्त भोजन और रहने की सुविधा जैसी व्यवस्थाएं जरूरतमंदों के लिए राहत जरूर हैं, लेकिन इनका दुरुपयोग न हो, इसके लिए निगरानी और सत्यापन की मजबूत व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है।
पिरान कलियर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था और निगरानी तंत्र को लेकर नगर पंचायत की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। लेकिन सवाल यह है कि नगर पंचायत और अन्य जिम्मेदार संस्थाएं अपने अधिकारों और व्यवस्थाओं को लेकर कितनी गंभीर हैं?
मुख्य चौराहों पर लगे कैमरे अगर बंद पड़े हैं और कई संवेदनशील स्थान CCTV विहीन हैं तो आखिर इसकी जवाबदेही किसकी है? अधिकारों की लड़ाई में सक्रिय नजर आने वाली संस्थाओं से अब जनता यह सवाल पूछ सकती है कि सुविधाओं और सुरक्षा की जिम्मेदारी के मोर्चे पर उनकी सक्रियता आखिर कहां है?
घटना के बाद पुलिस ने जांच का दायरा लगातार बढ़ाया है। 100 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा चुकी है। कोतवाली पुलिस की टीमों सहित एसओजी की टीमें भी जांच में जुटी हैं। पूर्व में जेल जा चुके आरोपियों से पूछताछ, बाहरी लोगों का सत्यापन, संदिग्धों से पूछताछ और क्षेत्र में चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।
सीओ देवव्रत जोशी पूरे मामले की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं, जबकि इंस्पेक्टर कमल मोहन भंडारी टीमों के साथ समन्वय बनाकर जांच की प्रगति का फीडबैक ले रहे हैं और आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं। पुलिस की टीमें लगातार संभावित ठिकानों और रास्तों को खंगाल रही हैं। बावजूद इसके अभी तक आरोपी तक पहुंचने वाला कोई ठोस सिरा हाथ नहीं लगा है।
इस घटना में आरोपी की गिरफ्तारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। पुलिस पूरी ताकत से जुटी हुई है और उम्मीद है कि जल्द ही आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होगा। लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा सवाल पिरान कलियर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी खड़ा हो गया है। अगर किसी धार्मिक-पर्यटन स्थल पर CCTV कैमरे बंद पड़े हों, संवेदनशील जगहों पर निगरानी न हो, रैनबसेरे जैसे स्थान कैमरों की नजर से बाहर हों और बाहरी लोगों की मौजूदगी पर प्रभावी निगरानी का अभाव हो, तो फिर जिम्मेदारी पुलिस के साथ साथ अन्य विभागों की भी उतनी ही है।



