
पंच👊नामा
रूड़की: सात वर्षीय मासूम से दुष्कर्म के जघन्य मामले में पुलिस से बचने के लिए खुद को मृत साबित करने की साजिश रचने वाले आरोपी की चाल आखिरकार नाकाम हो गई।
नहर किनारे अपने कपड़े, जूते और अन्य सामान छोड़कर आत्महत्या का भ्रम पैदा करने वाला आरोपी करीब दो माह तक पुलिस को चकमा देता रहा, लेकिन लगातार पीछा कर रही मंगलौर पुलिस ने आखिरकार उसे दबोच लिया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देश पर महिला एवं बाल अपराधों के प्रति हरिद्वार पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत इस सनसनीखेज मामले को गंभीरता से लेते हुए
पुलिस अधीक्षक ग्रामीण शेखर सुयाल के निर्देशन में विशेष टीमों का गठन किया गया। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई और न्यायालय से गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) भी प्राप्त किया गया।
प्रभारी निरीक्षक भगवान सिंह मेहर के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने सुरागरसी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर लगातार आरोपी की तलाश जारी रखी। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी ने स्वयं को मृत दर्शाने और पुलिस को गुमराह करने
की नीयत से नहर किनारे अपने कपड़े, जूते और अन्य सामान छोड़ दिए थे, ताकि ऐसा प्रतीत हो कि उसने नहर में कूदकर आत्महत्या कर ली है। हालांकि पुलिस ने इस झांसे में आए बिना हर पहलू पर गहन पड़ताल जारी रखी।
गौरतलब है कि कोतवाली मंगलौर क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने अप्रैल 2026 में अपनी सात वर्षीय नाबालिग पुत्री के साथ दुष्कर्म किए जाने के आरोप में नीटू उर्फ ज्ञानेंद्र निवासी ग्राम मन्नाखेड़ी के खिलाफ पोक्सो अधिनियम की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था।
घटना के बाद से आरोपी लगातार फरार चल रहा था। लगातार प्रयासों और सटीक सूचना के आधार पर मंगलौर पुलिस ने आखिरकार आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली। आरोपी के खिलाफ नियमानुसार अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।



