
पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार; न्याय की राह भले ही लंबी रही, लेकिन आखिरकार आठ वर्षीय मासूम बच्ची को इंसाफ मिल गया। करीब 17 माह पहले हुई दरिंदगी के मामले में पथरी पुलिस की मजबूत विवेचना, सटीक साक्ष्य संकलन और प्रभावी पैरवी के दम पर अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देशन में पुलिस द्वारा की गई सशक्त कार्रवाई और न्यायालय में पेश किए गए ठोस साक्ष्य इस फैसले की मजबूत आधारशिला बने, जो ऐसे मामलों में पुलिस की गंभीर कार्यशैली की एक मिसाल भी है।
पुलिस के अनुसार, थाना पथरी में 1 मार्च 2025 को बिहार निवासी व्यक्ति ने अपनी आठ वर्षीय नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई थी। घटना के बाद बच्ची की हालत बेहद गंभीर होने पर उसे तत्काल जिला अस्पताल हरिद्वार ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया। एम्स में कई दिनों तक उसका उपचार चला।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पथरी पुलिस ने बिना देरी किए कार्रवाई करते हुए 2 मार्च 2025 को आरोपी दयानन्द सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। विवेचना के दौरान महिला उपनिरीक्षक शाहिदा परवीन ने सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाते हुए आरोपी के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
मामले की सुनवाई स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में चली। दोनों पक्षों की दलीलों और पुलिस द्वारा प्रस्तुत ठोस साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने आरोपी दयानन्द सिंह को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
थाना प्रभारी रविन्द्र कुमार ने कहा कि इस मुकदमे में महिला उपनिरीक्षक शाहिदा परवीन द्वारा की गई मजबूत विवेचना, साक्ष्यों का प्रभावी संकलन और न्यायालय में हुई सशक्त पैरवी इस फैसले की सबसे बड़ी कड़ी रही।
उन्होंने विवेचक के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि यह फैसला न केवल पीड़ित बच्ची को मिला इंसाफ है, बल्कि महिला एवं बाल अपराधों के मामलों में पुलिस की गंभीरता और पेशेवर कार्यशैली की भी मजबूत नज़ीर है। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई आगे भी इसी दृढ़ता के साथ जारी रहेगी।



