हरिद्वार

“कप्तान साहब, इस लठैत सिपाही से बचाओ, भीड़ देखते ही सिर पर सवार हो जाता है जुनून..

देहात के एक थाने में तैनात चेतक सिपाही के लाठी प्रेम पर सवाल, कभी भी हो सकता है बड़ा बवाल..

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पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार; देहात क्षेत्र के एक थाने में तैनात एक ‘महान चेतक योद्धा’ इन दिनों खूब सुर्खियां बटोर रहा है। कहते हैं कि साहब की ड्यूटी रात में क्या लगी, खुद को इलाके का ‘वन मैन कमांडो फोर्स’ समझ बैठे। कहते हैं कि जहां चार लोग खड़े दिखाई दिए, वहीं इनकी नसों में बिजली दौड़ने लगती है और हाथ में पकड़ी लाठी मानो कह उठती है—”चलो भाई… आज फिर ड्यूटी निभाते हैं। “इलाके में चर्चा है कि शुरुआत में इनकी ड्यूटी एक संवेदनशील स्थल पर लगाई गई थी। लेकिन जनाब का दिल शायद वहां नहीं लगा। बड़े साहब से गुहार लगाई कि “हुजूर… हमें मैदान में उतारिए, गश्त कराइए…!” मौका मिला भी… लेकिन जनाब ने दो दिन में ही ऐसा प्रदर्शन कर दिया कि शिकायतों की फाइलें बड़े साहब की मेज तक पहुंच गईं।नतीजा… जनाब को वापस पुरानी ड्यूटी पर भेज दिया गया। लोगों ने सोचा कि शायद अब “लाठी को आराम मिलेगा।” मगर किस्मत को कुछ और मंजूर था। संवेदनशील स्थल का मामला खत्म हुआ और साहब फिर से रात की सड़कों के ‘सुपरहीरो’ बनकर लौट आए।कहते हैं कि “जिसके हाथ में हथौड़ा हो, उसे हर चीज कील ही दिखाई देती है।” बस यहां हथौड़े की जगह लाठी है। भीड़ दिखी नहीं कि संवाद की जगह डंडा बोलने लगता है। लोगों का कहना है कि “साहब पहले लाठी चलाते हैं, बाद में पूछते हैं—’मामला क्या था?‘”अब आलम यह है कि क्षेत्र में लोग मजाक में कहते फिर रहे हैं— “रात को निकलना है तो हेलमेट नहीं… किस्मत साथ लेकर निकलो, पता नहीं कब चेतक वाले साहब की नजर पड़ जाए और फिटनेस टेस्ट देकर घर लौटना पड़े.!सबसे दिलचस्प बात यह बताई जा रही है कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी बड़े साहब तक भी पहुंच चुकी है। फिर भी सवाल वही पुराना है—जब शिकायतें भी हैं, चर्चाएं भी हैं और अंदाज-ए-ड्यूटी भी विवादों में है… तो आखिर ऐसी जिम्मेदारी बार-बार उसी सिपाही को क्यों?इलाके के लोग तो यहां तक कहने लगे हैं— “कानून का खौफ होना चाहिए, लेकिन अगर कानून के नाम पर सिर्फ लाठी ही दिखाई दे, तो डर अपराधियों से कम और रखवालों से ज्यादा लगने लगता है। लोगो का कहना है कि, कहीं ऐसा न हो कि ‘लाठी प्रेम’ किसी दिन विभाग के लिए ही बड़ा सिरदर्द बन जाए। आखिर कानून का काम भरोसा जगाना है, खौफ का प्रदर्शन करना नहीं।

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