“गोली लगने से कांवड़िये की मौत के मामले में आईटीबीपी जवान को कोर्ट ने किया बरी..
साल 2017 में कांवड़ लेने हरिद्वार आया था हरियाणा का युवक, सर्वानंद घाट पर विवाद के दौरान जवान की रायफल से चली थी गोली..
पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: कांवड़ मेले के दौरान गोली लगने से युवक की मौत के बहुचर्चित मामले में अदालत ने आईटीबीपी जवान को बड़ी राहत दी है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप कुमार की अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद साक्ष्यों के अभाव में आरोपी जवान को दोषमुक्त कर दिया।
घटना 15 जुलाई 2017 की है। झज्जर हरियाणा निवासी विकास अपने साथियों के साथ हरिद्वार कांवड़ लेने पहुंचा था। सर्वानंद घाट पर किसी बात को लेकर आईटीबीपी कर्मियों से कहासुनी हो गई। विवाद ने अचानक उग्र रूप ले लिया। इसी दौरान गोली चलने की घटना हुई और विकास गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद मृतक के पिता कृष्ण कुमार ने कोतवाली हरिद्वार में तहरीर दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान आईटीबीपी की 50वीं बटालियन पंचकूला में तैनात संतोष चटर्जी को नामजद करते हुए आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 14 गवाह पेश किए और घटना को जानबूझकर की गई फायरिंग बताया। बचाव पक्ष ने इसे हादसा करार दिया और कहा कि ड्यूटी के दौरान झड़प में राइफल छीनने की कोशिश हुई, उसी दौरान गोली चल गई।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों, गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तार से परीक्षण किया। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि गोली जानबूझकर चलाई गई थी। परिस्थितियां इस ओर संकेत करती हैं कि हाथापाई के दौरान असावधानी में फायर हुआ।
अदालत ने यह भी माना कि आरोपी उस समय सरकारी ड्यूटी पर तैनात था और घटना अचानक हुई झड़प का परिणाम थी। ऐसे में आपराधिक मंशा सिद्ध न होने पर आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया। इन्हीं आधारों पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने संतोष चटर्जी को सभी आरोपों से बरी करने का आदेश सुनाया। यह मामला लंबे समय से चर्चा में रहा और अब करीब नौ साल बाद इसका न्यायिक निष्कर्ष सामने आया।



