“750 करोड़ का कुंभ कलश, लोनिवि के हिस्से 227 करोड़; सड़कों पर बहेगा विकास, गड्ढे भरने डीएम उतर रहे सड़क पर.!
कुंभ मेला अधिकारी के अधीन पीआईयू को मिले 91 करोड़, 29 करोड़ से होंगे अस्थायी कार्य; करोड़ों के बजट के बीच गड्ढे दूर कराने की कमान डीएम के हाथ..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार। कुंभ मेला-2027 को भव्य और दिव्य बनाने के लिए करीब 750 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट का कुंभ कलश तैयार है। इस कलश का बड़ा हिस्सा लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) के हिस्से में आया है। विभाग को 227 करोड़ रुपये से अधिक के काम मिले हैं। यानी अंतिम चरण में लोनिवि सड़कों पर विकास बहाने की तैयारी में है। दिलचस्प यह है कि करोड़ों का कुंभ कलश छलकने के बावजूद शहर की सड़कों के गड्ढे दूर कराने के लिए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित को खुद सड़क पर उतरना पड़ रहा है।
कुंभ मेला अधिकारी के अधीन काम कर रही लोनिवि की परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू) करीब 91 करोड़ रुपये के काम अपनी निगरानी में करा रही है। इनमें करीब 29 करोड़ रुपये अस्थायी कार्यों पर खर्च किए जा रहे हैं। मेला क्षेत्र के सेक्टर एक से 24 तक ड्रेसिंग, लेवलिंग और पहुंच मार्ग तैयार किए जा रहे हैं। हरकी पैड़ी क्षेत्र में 7.31 करोड़ रुपये की लागत से तीन अस्थायी पुल भी बनाए गए हैं।
इसके अलावा हरिद्वार और कनखल में सड़क, पाथवे और पुल समेत कई काम चल रहे हैं। मंडावर में स्वागत द्वार भी बनाया जा रहा है। कुंभ क्षेत्र में निर्माण कार्यों की रफ्तार बढ़ी है, लेकिन शहर की आम सड़कों पर तस्वीर पूरी तरह अलग नजर आती है। यही वजह है कि सड़कों को गड्ढामुक्त कराने के लिए डीएम मयूर दीक्षित को अधिकारियों की बैठकों और निर्देशों तक सीमित रहने के बजाय खुद मौके पर उतरना पड़ा।
डीएम के सड़क पर उतरने का सिलसिला केवल निरीक्षण भर नहीं है। उन्होंने मौके पर सड़कों की स्थिति देखी और संबंधित अधिकारियों को गड्ढे तत्काल भरने तथा सड़क सुधार के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। करोड़ों रुपये के कुंभ बजट के बीच प्रशासन को यह कवायद इसलिए करनी पड़ रही है कि कुंभ से पहले शहर की प्रमुख सड़कें राहगीरों के लिए सुरक्षित और सुगम हो सकें।
ऐसे में सवाल यह भी है कि 227 करोड़ रुपये से अधिक के लोनिवि कार्यों के बाद शहर की सड़कों की तस्वीर कितनी बदलेगी। खासकर तब, जब 29 करोड़ रुपये अस्थायी कार्यों पर खर्च किए जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि कुंभ का विकास सड़कों पर कितना बहता है और अस्थायी कामों की चमक अर्द्धकुंभ के बाद तक कितनी टिकती है।



