
पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार; साइबर अपराधियों के खिलाफ हरिद्वार पुलिस का ताबड़तोड़ अभियान लगातार जारी है। एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देश पर पुलिस ने अंतर्राज्यीय ‘मगध साइबर गैंग’ के नेटवर्क पर एक और बड़ा प्रहार करते हुए गैंग के ऋषिकेश स्थित नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है।
पुलिस ने गैंग को फर्जी बैंक खाते यानी म्यूल अकाउंट्स उपलब्ध कराने वाले मुख्य मददगार को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाता था और इन्हीं खातों को साइबर ठगी की रकम मंगाने के लिए गैंग के हवाले कर मोटा कमीशन कमाता था।
एसपी सिटी अभय सिंह के निर्देशन में कोतवाली श्यामपुर पुलिस और सीआईयू हरिद्वार की विशेष टीम ने डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी सर्विलांस के जरिए आरोपी तक पहुंचने में सफलता हासिल की। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी पहले से गिरफ्तार हो चुके मगध साइबर गैंग के मुख्य सरगना कृष्णा पाण्डेय के सीधे संपर्क में था और ऋषिकेश में रहकर गैंग के लिए बैंक खातों की व्यवस्था करता था।
कोतवाली श्यामपुर में दर्ज मुकदमा में वांछित चल रहे आरोपी सागर पाण्डेय की तलाश के लिए थाना प्रभारी नितेश शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी। इस दौरान सीआईयू हरिद्वार की तकनीकी टीम ने आरोपी के डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर उसकी लोकेशन चंद्रेश्वर रोड, मायाकुंड क्षेत्र ऋषिकेश में ट्रेस की। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और काले रंग की स्कूटी से जा रहे आरोपी को दबोच लिया।
पूछताछ में आरोपी की पहचान सागर पाण्डेय पुत्र राधेराम पाण्डेय, निवासी ग्राम सिकंदपुर, थाना सिकन्दरपुर, जिला बलिया, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई। वर्तमान में वह मायाकुंड, ऋषिकेश में रह रहा था। आरोपी ने स्वीकार किया कि वह मगध साइबर गैंग के मुख्य सरगना कृष्णा पाण्डेय के संपर्क में था।
वह स्थानीय लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाता और फिर उन खातों को साइबर ठगी से अर्जित रकम मंगाने के लिए गैंग को उपलब्ध कराता था। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने विशाल और श्याम नामक व्यक्तियों के कुल 18 बैंक खाते गैंग को उपलब्ध कराए थे, जिसके बदले उसे भारी कमीशन मिलता था।
साथियों की गिरफ्तारी के बाद मिटाए डिजिटल सबूत…..
पुलिस के मुताबिक आरोपी काफी शातिर तरीके से काम कर रहा था। जैसे ही उसे जानकारी मिली कि गैंग के उसके पांच साथी पुलिस के हत्थे चढ़कर जेल जा चुके हैं, वह घबरा गया। खुद तक पुलिस की पहुंच रोकने के लिए उसने अपने मोबाइल फोन से व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड और साथियों के मोबाइल नंबर डिलीट कर दिए।
हालांकि, पुलिस की तकनीकी जांच के आगे उसकी यह चाल ज्यादा देर नहीं चल सकी। जांच के दौरान पुलिस ने मोबाइल की गैलरी से विशाल के नाम दर्ज एक बैंक खाते से संबंधित फोटो और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद कर लिए।
पुलिस टीम में….
इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में थाना प्रभारी नितेश शर्मा, चौकी प्रभारी चंडी घाट देवेंद्र सिंह तोमर, कांस्टेबल विनित कुमार, कांस्टेबल राहुल देव, कांस्टेबल वसीम व सीआईयू हरिद्वार की टीम शामिल रही।



