
पंच👊नामा-ब्यूरो
देहरादून; उत्तराखंड में साइबर अपराधियों के खिलाफ अब सिर्फ ठगी करने वालों पर ही नहीं, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कसने की तैयारी है। ठगी की रकम ठिकाने लगाने वाले मनी म्यूल अकाउंट, ATM से नकदी निकालने वाले गिरोह, चेक के जरिए रकम ट्रांसफर करने वाले नेटवर्क,
फर्जी या संदिग्ध SIM उपलब्ध कराने वाले POS और साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले डिजिटल संसाधनों तक पहुंचते हुए उत्तराखंड STF ने प्रदेशव्यापी 7 दिवसीय “ऑपरेशन हॉटस्पॉट” चलाकर बड़ी कार्रवाई की है। अभियान के दौरान 820 संदिग्ध बैंक खातों का सत्यापन, 1,236 ATM निकासी लोकेशन और 84 चेक निकासी मामलों की जांच के साथ ही दर्जनों मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
अपर पुलिस महानिदेशक सी. मुरुगेशन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर STF, साइबर क्राइम यूनिट, जिला साइबर सेल और जनपद पुलिस ने मिलकर साइबर अपराध से जुड़े हॉटस्पॉट को चिन्हित कर एक साथ कार्रवाई की। उन्होंने बताया कि I4C, दूरसंचार विभाग (DoT), RBI और अन्य संबंधित संस्थाओं से मिले
तकनीकी व वित्तीय इनपुट का विश्लेषण कर उसे जमीनी कार्रवाई में बदला गया। अभियान के दौरान साइबर अपराध की उस पूरी चेन को निशाने पर लिया गया, जिसमें ठगी करने वाले अपराधी, ठगी की रकम प्राप्त करने वाले मनी म्यूल, रकम निकालने वाले लोग और साइबर अपराध के लिए संसाधन उपलब्ध कराने वाले सहयोगी शामिल हैं।
एसटीएफ कप्तान अजय सिंह ने बताया कि “ऑपरेशन हॉटस्पॉट” से पहले 01 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक साइबर सुरक्षा अभियान चलाकर व्यापक तकनीकी विश्लेषण किया गया। इस दौरान संदिग्ध मोबाइल नंबर, SIM, IMEI, मनी म्यूल बैंक खाते, ATM और चेक निकासी लोकेशन, SIM-POS और
अन्य डिजिटल व वित्तीय संकेतकों का अध्ययन कर कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी तैयार की गई। इसके बाद 24 अगस्त से 01 सितंबर तक सात दिवसीय विशेष अभियान चलाकर चिन्हित हॉटस्पॉट पर जमीनी स्तर पर सत्यापन, दबिश, पूछताछ, डिजिटल साक्ष्य जुटाने, मुकदमा दर्ज करने और गिरफ्तारियों की कार्रवाई की गई।
820 संदिग्ध बैंक खाते खंगाले, 159 मुकदमे दर्ज……
अभियान के दौरान साइबर अपराध से जुड़े 820 संदिग्ध बैंक खातों का सत्यापन किया गया, जिसके आधार पर 159 FIR दर्ज की गईं। जांच एजेंसियों ने सिर्फ खाताधारकों तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि उन खातों का संचालन करने वाले लोगों, बिचौलियों और उनके पीछे सक्रिय साइबर नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश की।
ATM से रकम निकालने वालों पर भी शिकंजा…..
साइबर ठगी की रकम को नकदी में बदलकर डिजिटल मनी ट्रेल तोड़ने वाले अपराधियों पर भी पुलिस ने विशेष फोकस किया। 1,236 ATM निकासी मामलों और लोकेशन का सत्यापन कर 32 मुकदमे दर्ज किए गए। वहीं, 84 चेक निकासी मामलों की जांच में 37 FIR दर्ज की गईं। इन मामलों के जरिए पुलिस को संबंधित खाताधारकों, लाभार्थियों, ATM कार्ड इस्तेमाल करने वालों और स्थानीय सहयोगियों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं।
644 संदिग्ध SIM और 630 IMEI ब्लॉक…….
डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले 644 संदिग्ध SIM और 630 IMEI ब्लॉक कराए गए हैं। इसके साथ ही 442 संदिग्ध मामलों का सत्यापन किया गया। वहीं, साइबर अपराधियों तक संदिग्ध तरीके से SIM पहुंचाने वाली सप्लाई चेन पर भी कार्रवाई करते हुए 22 संदिग्ध SIM-POS का सत्यापन कर 10 मुकदमे दर्ज किए गए।
हरिद्वार में “नवादा ग्रुप” का खुलासा, पांच गिरफ्तार….
“ऑपरेशन हॉटस्पॉट” के दौरान हरिद्वार में थाना श्यामपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली। तकनीकी डेटा के विश्लेषण के आधार पर संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क “नवादा ग्रुप” का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच में इस नेटवर्क से जुड़े 200 से अधिक बैंक खाते सामने आए हैं, जिनमें साइबर ठगी की रकम के सीधे लेनदेन के साक्ष्य मिले हैं।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 45 से अधिक ATM कार्ड, 20 बैंक पासबुक, दो लैपटॉप और 17 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि लोन, ऑनलाइन ट्रेडिंग और पैसा दोगुना करने जैसे प्रलोभन देकर लोगों से ठगी की जाती थी और रकम को मनी म्यूल खातों में भेजने के बाद ATM से निकालकर या CDM के जरिए दूसरे खातों में ट्रांसफर कर मनी ट्रेल को तोड़ने का प्रयास किया जाता था। इस नेटवर्क से जुड़ी कार्रवाई में मथुरा में भी गिरफ्तारी की गई है, जबकि नवादा, बिहार में अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
हरिद्वार में ATM से ठगी की रकम निकालने वाले दो आरोपी गिरफ्तार……
जनपद हरिद्वार के थाना पथरी पुलिस ने ATM निकासी डेटा के आधार पर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि उनके बैंक खातों में साइबर ठगी की रकम की पहली परत यानी Layer-01 की धनराशि जमा होती थी, जिसे आरोपी करीब पांच प्रतिशत कमीशन लेकर ATM के जरिए निकालते थे।
कोटद्वार की ₹3.86 लाख की साइबर ठगी में रुड़की का आरोपी गिरफ्तार…..
कोटद्वार में फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर हुई ₹3.86 लाख की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने फरार आरोपी आशीष रिचर्ड निवासी रुड़की को गिरफ्तार किया है। जांच में आरोपी के आठ बैंक खाते सामने आए, जिनमें करीब ₹1.50 करोड़ की संदिग्ध साइबर ठगी की धनराशि प्राप्त होने की जानकारी मिली। इनमें से लगभग ₹7 लाख की रकम फ्रीज कराई गई है। आरोपी के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों से 19 शिकायतें दर्ज होने की बात भी सामने आई है।
240 साइबर अपराधियों की मैपिंग, 100 से अधिक अंतरराज्यीय कड़ियां मिलीं…..
वर्ष 2026 में 240 साइबर अपराधियों और संदिग्धों का विवरण I4C के समन्वय पोर्टल पर अपलोड कर उनकी अन्य राज्यों के मामलों से मैपिंग की गई। इस प्रक्रिया में 100 से अधिक अंतरराज्यीय साइबर अपराध कड़ियां सामने आई हैं। STF का मानना है कि इस तरह अलग-अलग राज्यों में सक्रिय साइबर नेटवर्क के बीच संबंधों को पहचानने और संयुक्त कार्रवाई में मदद मिल रही है।
1930 हेल्पलाइन के जरिए ₹23.44 करोड़ की रकम होल्ड/सेव…..
उत्तराखंड पुलिस ने वर्ष 2026 में 1930/NCRP पर प्राप्त 18,749 साइबर अपराध शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए पुलिस, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के समन्वय से करीब ₹23.44 करोड़ की ठगी की रकम होल्ड या सेव कराई है। इसी अवधि में प्राप्त 683 ई-जीरो FIR में से 659 को नियमित FIR से जोड़ा या परिवर्तित किया गया।
1.75 लाख विद्यार्थियों तक पहुंचा साइबर जागरूकता अभियान……
साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई के साथ पुलिस ने जागरूकता को भी अपनी रणनीति का अहम हिस्सा बनाया है। 27 अगस्त 2026 को आयोजित राज्यव्यापी वर्चुअल साइबर जागरूकता कार्यक्रम में 1,100 से अधिक राजकीय विद्यालयों के करीब 1.75 लाख छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान AI और डीपफेक, साइबर बुलिंग, सेक्सटॉर्शन, ऑनलाइन गेमिंग, डिजिटल अरेस्ट, निवेश धोखाधड़ी और सोशल मीडिया सुरक्षा जैसे विषयों पर जागरूक किया गया।
2000 पुलिसकर्मियों के साथ हॉटस्पॉट पर टारगेटेड एक्शन…..
अभियान के अंतिम चरण में देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर और नैनीताल के चिन्हित साइबर हॉटस्पॉट क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया गया। STF की तकनीकी टीम और स्थानीय पुलिस के नेतृत्व में करीब 2000 पुलिसकर्मी संदिग्ध लोकेशन, मनी म्यूल खाताधारकों, चेक निकासी स्थानों और संदिग्ध बैंक शाखाओं से जुड़े मामलों की जांच में जुटे हैं। कार्रवाई के दौरान 300 से अधिक संदिग्ध व्यक्तियों को निरुद्ध कर पूछताछ की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर नोटिस, मुकदमा और गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों ने साफ किया कि “ऑपरेशन हॉटस्पॉट” केवल सात दिन का अभियान नहीं, बल्कि साइबर अपराध के खिलाफ लंबी लड़ाई की शुरुआत है। आने वाले दिनों में भी PRATIBIMB, NCRP और अन्य तकनीकी माध्यमों से मिलने वाली खुफिया जानकारी का लगातार विश्लेषण कर मनी म्यूल खातों, संदिग्ध बैंक खातों, SIM-POS और साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले पूरे डिजिटल व वित्तीय नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।



