हरिद्वार

“अमेरिकन आश्रम की जमीन पर कब्जे की कहानी में नया ट्विस्ट, दीवार के बाद दुकानें बनीं तो उठे कई बड़े सवाल.!

कौन करा रहा निर्माण, कौन है सोलंकी और किस रईसजादे और ‘भगवाधारी’ का नाम चर्चा में? खाईनुमा जमीन के समतलीकरण पर भी उठे सवाल..

खबर को सुनें

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार; भूपतवाला स्थित स्वामी देवानंद के नाम से स्थापित अमेरिकन आश्रम की बेशकीमती जमीन को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। आश्रम की भूमि पर कथित कब्जे और निर्माण को लेकर अब कई सवाल एक साथ खड़े हो रहे हैं। मामला केवल करीब तीन बीघा जमीन पर खड़ी की गई चाहरदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके आसपास विकसित हुई दुकानों, जमीन के स्वरूप में हुए बदलाव और इससे जुड़े कुछ लोगों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।बताया जाता है कि आश्रम की कुल संपत्ति करीब 26 बीघा के आसपास है। कावड़ यात्रा के दौरान आश्रम के पिछले हिस्से में अचानक करीब तीन बीघा भूमि को घेरकर चाहरदीवारी खड़ी कर दी गई। स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी भूमि पर निर्माण शुरू होने और दीवार खड़ी होने के दौरान ट्रस्ट की ओर से तत्काल आपत्ति क्यों नहीं जताई गई।दीवार के बाद दुकानों ने बढ़ाया संदेह…..?
मामले में नया पहलू यह सामने आ रहा है कि आश्रम की विवादित भूमि के आसपास दुकानों का निर्माण कैसे और किसकी अनुमति से हुआ। जमीन पर निर्माण की स्थिति, रास्ते और आसपास की संपत्तियों के स्वामित्व को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सोलंकी नाम का भी जिक्र सामने आ रहा है। हालांकि उसकी वास्तविक भूमिका और जमीन से संबंध क्या है, यह जांच का विषय है। स्थानीय चर्चाओं में एक चर्चित भगवाधारी संत का नाम भी लिया जा रहा है। इसके अलावा कुछ अन्य लोगों के नाम और जमीनों के संबंध में भी तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं। हालांकि इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।खाईनुमा जमीन का बदला स्वरूप भी सवालों में….
आश्रम से सटी एक जमीन पहले खाईनुमा स्थिति में बताई जाती है। आरोप है कि कथित अवैध खनन और मिट्टी भरान के जरिए जमीन को समतल कर दिया गया। यदि ऐसा हुआ है तो यह भी जांच का विषय है कि मिट्टी कहां से आई, किसकी अनुमति से भरान हुआ और संबंधित विभागों ने इस दौरान क्या कार्रवाई की।ट्रस्ट की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल…..
पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल अमेरिकन आश्रम ट्रस्ट की कार्यशैली को लेकर उठ रहे हैं। करोड़ों की संपत्ति पर कथित कब्जे की बात सामने आने के बावजूद ट्रस्ट की ओर से समय रहते प्रभावी कानूनी कदम क्यों नहीं उठाया गया? क्या ट्रस्ट के पास जमीन से संबंधित मूल दस्तावेज सुरक्षित हैं? वर्तमान में ट्रस्ट का वास्तविक संचालन कौन कर रहा है? और यदि जमीन पर अवैध कब्जा हुआ तो मौके पर तत्काल विरोध क्यों नहीं हुआ? आश्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि ट्रस्ट की प्रमुख कर्ताधर्ता लंबे समय से विदेश में हैं। ऐसे में ट्रस्ट का वास्तविक संचालन कौन कर रहा है, यह भी स्पष्ट होना जरूरी है।बड़ी डील की चर्चा, जांच से ही खुलेगा राज…?
आश्रम की जमीन को लेकर क्षेत्र में कथित बड़ी डील की चर्चाएं भी चल रही हैं। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि जमीन की मौजूदा स्थिति के पीछे केवल कब्जे का मामला है या इसके पीछे किसी बड़े लेनदेन की भूमिका भी है। अब निगाह प्रशासन की जांच पर है। यदि पूरे मामले में राजस्व अभिलेख, भूमि की पैमाइश, निर्माण की अनुमति, खनन और भरान की जांच के साथ ट्रस्ट के दस्तावेजों की पड़ताल की जाए तो तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है।सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर अमेरिकन आश्रम की जमीन पर दीवार खड़ी होने से लेकर दुकानों के बनने तक जिम्मेदार तंत्र की नजर क्यों नहीं पड़ी?

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!