“ऊर्जा निगम: मीटर शिफ्टिंग में बड़ा खेल! पुराने केबल जोड़कर चालू कर रहे सप्लाई, कागजों में दिखा रहे नया..
ज्वालापुर सेकेंड फीडर में केबल के नाम पर फर्जीवाड़ा, सीलिंग प्रमाण पत्र में नए केबल का दावा, स्थानीय अधिकारियों के निर्देश ठेकेदार के ठेंगे पर..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार। ऊर्जा निगम में मीटर शिफ्टिंग के नाम पर फर्जीवाड़े सामने आया है। ज्वालापुर सेकेंड फीडर क्षेत्र में पुराने कटे हुए केबल जोड़कर बिजली की सप्लाई चालू करने और दस्तावेजों में नया केबल बताकर गोलमाल किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि स्थानीय अधिकारियों से शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिससे ऊर्जा निगम की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है।
पहले नए केबल लगाए, अब पुराने जोड़कर चला रहे सप्लाई…?
कुछ दिन पहले तक आसपास के क्षेत्रों में मीटर शिफ्टिंग के दौरान इनपुट और आउटपुट में नए केबल लगाए जा रहे थे। यह काम ठेकेदार के कर्मचारी विभाग की ओर से कर रहे थे। अब ज्वालापुर सेकेंड फीडर क्षेत्र में ही पुराने कटे हुए केबल जोड़कर बिजली की सप्लाई चालू की जा रही है। यदि पहले नए केबल लगाए गए थे तो अब पुराने केबल इस्तेमाल करने की नौबत क्यों आई? यदि पुराने केबल लगाए जा रहे हैं तो सीलिंग प्रमाण पत्र में नए केबल का उल्लेख क्यों किया जा रहा है? इन सवालों का जवाब ऊर्जा निगम को देना होगा।
स्थानीय उपखंड अधिकारी को दिनभर दी जानकारी, फिर भी कार्रवाई नहीं….
पूरे मामले से स्थानीय उपखंड अधिकारी को दिनभर अवगत कराया जाता रहा, लेकिन इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। एसडीओ की मना करने के बावजूद ठेकेदार के कर्मचारियों ने मनमानी करते हुए पुराने कटे हुए केबल जोड़कर बिजली की सप्लाई चालू कर दी। इसके बाद दस्तावेजों में नया केबल लगाए जाने की जानकारी दर्शाकर लोगों से हस्ताक्षर भी करा लिए गए। ऐसे में सवाल उठता है कि जब स्थानीय उपखंड अधिकारी को अनियमितता की लगातार जानकारी दी जा रही थी तो काम पर रोक क्यों रोका गया? क्या ठेकेदार के कर्मचारी अधिकारियों के निर्देशों को दरकिनार कर अपनी मर्जी से काम कर रहे हैं? शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से विभागीय निगरानी और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
कागजों में नया केबल, मौके पर पुराने तार…!
आरोप है कि मीटर शिफ्टिंग के दौरान पुराने केबल जोड़कर सप्लाई चालू की जा रही है, जबकि सीलिंग प्रमाण पत्र में नए केबल लगाए जाने की जानकारी दर्ज की जा रही है। यदि दस्तावेजों में दर्ज विवरण और मौके की वास्तविक स्थिति में अंतर पाया जाता है तो यह गंभीर अनियमितता का मामला हो सकता है। ऐसे में सीलिंग प्रमाण पत्रों, केबल की खरीद और खपत के रिकॉर्ड तथा मौके पर किए गए कार्यों का मिलान कराना जरूरी है।
करंट फैलने का खतरा, विभाग को राजस्व नुकसान की आशंका…..
पुराने और कटे हुए केबल जोड़कर बिजली सप्लाई चालू करने से विद्युत सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इससे करंट फैलने और जानमाल के नुकसान का खतरा बना रहता है। वहीं, नए केबल के नाम पर पुराने केबल इस्तेमाल किए जाने का आरोप सही साबित होने पर सामग्री के हिसाब-किताब और विभागीय राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका की भी जांच करनी होगी। ऐसे में यह मामला केवल मीटर शिफ्टिंग की प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल से भी जुड़ा है।
लिखित शिकायत की तैयारी, जांच में खुल सकता है पूरा मामला…..
मामले की लिखित शिकायत की तैयारी की जा रही है। जिसमें पूरे प्रकरण की जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई जाएगी। अब सवाल यह है कि ऊर्जा निगम पहले आसपास के क्षेत्रों में लगाए गए नए केबल और वर्तमान में इस्तेमाल हो रहे केबल का सत्यापन कराएगा या नहीं। इनपुट और आउटपुट में लगाए गए केबल का रिकॉर्ड, सीलिंग प्रमाण पत्र, लोगों से लिए गए हस्ताक्षर और ठेकेदार के कार्यों की जांच से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब आसपास के क्षेत्रों में नए केबल लगाए जा रहे थे तो अब पुराने केबल जोड़कर सप्लाई क्यों चलाई जा रही है? यदि पुराने केबल ही इस्तेमाल किए जा रहे हैं तो दस्तावेजों में उन्हें नया क्यों दर्शाया जा रहा है? और जब स्थानीय उपखंड अधिकारी को दिनभर मामले की जानकारी दी जा रही थी तो अनियमितता पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? इन सवालों के जवाब के लिए निष्पक्ष जांच और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है।



