पंच👊नामा
पिरान कलियर: विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक की नगरी पिरान कलियर, जहां देश-विदेश से लाखों जायरीन अकीदत के साथ हाजिरी देकर फैज हासिल करने पहुंचते हैं, वहीं कुछ असामाजिक तत्व इस पवित्र नगरी की छवि को दागदार करने पर आमादा दिखाई दे रहे हैं। दरगाह किलकिली साहब क्षेत्र स्थित एक चर्चित गेस्ट हाउस एक बार फिर स्थानीय लोगों के आरोपों और चर्चाओं के केंद्र में है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि उक्त गेस्ट हाउस में लंबे समय से अनैतिक गतिविधियां और कथित देहव्यापार का धंधा धड़ल्ले से संचालित किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि पूर्व में भी पुलिस इस गेस्ट हाउस पर कार्रवाई कर देहव्यापार के मामलों का भंडाफोड़ कर चुकी है, लेकिन हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि कई बार उन्होंने संबंधित विभागों और पुलिस प्रशासन के समक्ष इस मामले को उठाया, लेकिन कार्रवाई महज औपचारिकताओं तक सीमित होकर रह जाती है। आरोप है कि कुछ दिनों की खामोशी के बाद फिर वही पुराना खेल शुरू हो जाता है। स्थानीय लोगों के आरोपों में सबसे गंभीर पहलू यह है कि गेस्ट हाउस संचालकों को कथित तौर पर कार्रवाई से पहले ही भनक लग जाती है।
क्षेत्रवासियों का दावा है कि गेस्ट हाउस के पिछले हिस्से में एक वैकल्पिक रास्ता बनाया गया है, जिसके जरिए संदिग्ध महिलाओं को बाहर निकाल दिया जाता है। ऐसे में जब पुलिस या स्थानीय लोग मौके पर पहुंचते हैं तो अंदर सब कुछ “दुरुस्त” दिखाई देता है और मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
आसपास रहने वाले परिवारों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों का सीधा असर क्षेत्र के माहौल और बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है। लोगों का मानना है कि आस्था और आध्यात्मिकता के लिए पहचाने जाने वाले क्षेत्र में इस प्रकार की चर्चाएं पूरे कलियर की प्रतिष्ठा को धूमिल कर रही हैं।
पूर्व में पुलिस कार्रवाई के बावजूद यदि वही गेस्ट हाउस दोबारा चर्चाओं में है, तो स्वाभाविक तौर पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या कार्रवाई केवल खानापूर्ति बनकर रह गई है? क्या अनैतिक कारोबार पर स्थायी रोक लगाने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं है? और सबसे बड़ा सवाल यह कि यदि आरोपों में सच्चाई है तो आखिर किसकी छत्रछाया में यह कथित खेल बार-बार परवान चढ़ रहा है?
फिलहाल स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच कराई जाए, यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि ऐसी सख्त कार्रवाई हो जिससे आस्था की नगरी की गरिमा पर लग रहे कथित दाग को हमेशा के लिए मिटाया जा सके।



