“मजबूत विवेचना लाई रंग, पत्नी की हत्या से जुड़े चर्चित कांड में अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा..
कोरोना काल में हुई थी हत्या, तत्कालीन थाना प्रभारी लखपत सिंह बुटोला की सटीक जांच पर कोर्ट ने लगाई मुहर..

पंच👊नामा-ब्यूरो
रोशनाबाद: कोरोना काल में पत्नी की बेरहमी से हत्या के चर्चित मामले में चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश आरके श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी पति को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
जुर्माना न देने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इस पूरे मामले में तत्कालीन थाना सिडकुल प्रभारी लखपत सिंह बुटोला की पुख्ता और बारीक जांच ने अहम भूमिका निभाई, जिस पर कोर्ट ने भी भरोसा जताया।
मामला 24 जुलाई 2021 का है। थाना सिडकुल क्षेत्र के हेतमपुर में रहने वाला राजेश कुमार अपनी पत्नी राजकुमारी के साथ किराये के मकान में रहता था। शादी को करीब आठ साल हो चुके थे, लेकिन कुछ समय से दोनों के बीच झगड़े बढ़ गए थे।
घटना की शाम करीब आठ बजे राजेश ने गुस्से में आकर पत्नी पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमले में राजकुमारी की मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी भाग निकला। मृतका के भाई भरत की शिकायत पर थाना सिडकुल में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया।
तत्कालीन थाना प्रभारी लखपत सिंह बुटोला ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत घटनास्थल का मुआयना किया। आसपास के लोगों से पूछताछ की, सबूत जुटाए और कड़ियों को जोड़ते हुए मजबूत चार्जशीट तैयार की। जांच के दौरान हर पहलू को ध्यान में रखा गया, जिसका फायदा अदालत में साफ नजर आया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 गवाह पेश किए। चश्मदीद यशवीर ने कोर्ट में बताया कि उसने अपनी आंखों से राजेश को हमला करते देखा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों ने भी आरोपी के खिलाफ तस्वीर साफ कर दी।
बचाव पक्ष ने यह कहकर बचाने की कोशिश की कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है और वह एक साल से पत्नी से अलग रह रहा था। हालांकि अदालत ने गवाहों के बयान और पुख्ता सबूतों के आधार पर आरोपी को दोषी मानते हुए उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुना दी।
गौरतलब है कि एक सप्ताह पहले भी लिव इन पार्टनर की हत्या से जुड़े एक अन्य मामले में, जिसकी जांच भी लखपत सिंह बुटोला ने की थी, अदालत ने दोषी को उम्रकैद सुनाई थी। वर्तमान में वह टिहरी गढ़वाल जिले के हिंडोलखाल थाने में प्रभारी हैं।
एक सप्ताह के भीतर लखपत बुटोला की विवेचना में उम्रकैद के फैसले से जुड़ा या दूसरा मामला सामने आया है। अदालत के इस फैसले को कड़ी और निष्पक्ष पुलिस जांच की जीत के रूप में देखा जा रहा है।



