“पुलिस में अदला-बदली की बयार, शादियों के ऑफ सीजन में चल पड़ा फूलों का कारोबार..
पहले महीने में एक-दो बार आता था गुलदस्तों की बिक्री में उछाल, अब तो रोजाना माला-माल..
पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: जिले में जब भी कोई बड़ी कुर्सी हिलती है, फूल कारोबारियों के बाएं हाथ में हरकत होने लगती है। मतलब कि कारोबार में तेज़ी आने को है। मगर आजकल पुलिस महकमे में तबादलों की हवा चल रही है, इसलिए फूल मंडी में रौनक है। शादियों का ऑफ सीजन चल रहा है, बारातें कम हैं, बैंड-बाजा भी थोड़ा सुस्त है, लेकिन पुलिस विभाग की अदला-बदली ने फूल कारोबारियों के चेहरे खिला दिए हैं।
फूल विक्रेताओं का कहना है कि पहले महीने में एक-दो बार ही गुलदस्तों की बिक्री बढ़ती थी, जब किसी अफसर का तबादला होता या कोई नई पोस्टिंग आती थी। मगर अब हर दिन किसी न किसी थाने या चौकी में नए साहब की एंट्री हो रही है और स्वागत में गुलदस्तों की बारिश हो रही है। एक नए कोतवाली प्रभारी ने तो गुलदस्ते पकड़ने का रिकॉर्ड ही बना डाला। यह भी बताया जा रहा है की फुल कारोबारिक सुबह उठते ही सबसे पहले मोबाइल चेक करते हैं कि रात में कितनी लंबी लिस्ट आई है, उसी के हिसाब से मंडी का रेट तय होता है।
जिसके बाद फूलों की दुकानों पर सुबह से शाम तक “बधाई हो साहब” वाले बुके तैयार होते नजर आते हैं। एक फूल कारोबारी ने मुस्कुराते हुए कहा कि “शादी-ब्याह कम हो रहे हैं तो क्या हुआ, पहले दूल्हा-दुल्हन के लिए बुके बनाते थे, आज-कल साहब के स्वागत के लिए।” उन्होंने मजाक में यह भी कहा कि अगर इसी रफ्तार से तबादले होते रहे तो फूलों के दाम भी पेट्रोल-डीजल की तरह रोज बदलने पड़ेंगे।
शहर में चर्चा यह भी है कि जैसे ही नई पोस्टिंग की खबर आती है, कुछ लोग पहले ही फूलों की एडवांस बुकिंग करा देते हैं, ताकि स्वागत में कोई कमी न रह जाए। थाने के बाहर खड़े होकर लोग एक-दूसरे से पूछते नजर आते हैं—“साहब आ गए क्या?” और दूसरी तरफ फूल वाले पूछते हैं—“गुलदस्ता बड़ा बनाऊं या स्पेशल?”कुल मिलाकर हरिद्वार में इन दिनों दो ही चीजें सबसे ज्यादा चल रही हैं—एक तबादले और दूसरा गुलदस्ता। पुलिस विभाग में कुर्सियां बदल रही हैं और फूल वालों की किस्मत खिल रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर कुछ दिन और यही सिलसिला चलता रहा तो फूल कारोबारियों को शादी सीजन का इंतजार करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। पुलिस महकमे की हलचल ही उनके लिए “बारात सीजन” बन चुकी है। कहना गलत न होगा कि हरिद्वार में पुलिस तबादलों की बयार ने फूलों के कारोबार में नई जान डाल दी है। कुर्सियां बदल रही हैं, माला बदल रही है, गुलदस्ते बदल रहे हैं और फूल वाले मुस्कुरा रहे हैं—क्योंकि उनकी रोटी-दाल भी बराबर चल रही है।



