“कुंभ से पहले अखाड़ों की खींचतान तेज, दो गुटों की तनातनी में फंसा मेला प्रशासन; मंत्री की बैठक बनी शक्ति प्रदर्शन का मंच..!

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार। आगामी कुंभ मेले से पहले अखाड़ा परिषद के दो गुटों के बीच चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आने लगा है। शहरी विकास मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में एक गुट के शामिल होने और दूसरे गुट के बहिष्कार ने यह साफ कर दिया कि संत समाज के भीतर मतभेद अभी समाप्त नहीं हुए हैं। इस पूरे घटनाक्रम में मेला प्रशासन भी दोनों पक्षों के बीच असहज स्थिति में नजर आया।
जानकारी के अनुसार, बैठक से पहले मेला प्रशासन के अधिकारी आठ अखाड़ों वाले गुट के भंडारे में पहुंचे थे। इसे निरंजनी अखाड़े की अगुवाई वाले अखाड़ा परिषद गुट ने पक्षपात के रूप में लिया। परिषद अध्यक्ष महंत रविन्द्र पुरी ने नई अखाड़ा परिषद को “फर्जी” बताते हुए अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए और विरोधस्वरूप बैठक का बहिष्कार कर दिया।
दूसरी ओर, आठ अखाड़ों वाले गुट के साधु-संत बैठक में मौजूद रहे और उन्होंने कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर अपने सुझाव दिए। इसी गुट ने हाल ही में कनखल में बैठक कर अखाड़ा परिषद की नई कार्यकारिणी की घोषणा भी की थी, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच टकराव और खुलकर सामने आ गया।
राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कुंभ जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन से पहले संत समाज की एकजुटता को अहम माना जाता है। ऐसे में दो प्रमुख गुटों के बीच बढ़ती दूरी भविष्य की तैयारियों पर असर डाल सकती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि मेला प्रशासन और सरकार दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर विवाद को सुलझाने में कितने सफल होते हैं।
बैठक में ये अखाड़े रहे मौजूद….
बैठक में महानिर्वाणी अखाड़ा, निर्मोही अखाड़ा, निर्वाण अखाड़ा, दिगंबर अखाड़ा, निर्मल अखाड़ा, नया अखाड़ा, बड़ा अखाड़ा और अटल अखाड़ा के प्रतिनिधि शामिल हुए। इन आठ अखाड़ों ने दो दिन पहले कनखल में बैठक कर नई अखाड़ा परिषद की कार्यकारिणी की घोषणा की थी, जिसमें श्रीमहंत रविंद्रपुरी को सचिव और श्रीमहंत राजेन्द्र दास को महामंत्री चुना गया था।



