
पंच👊नामा
पिरान कलियर; कहते हैं कि “जहां व्यवस्था कमजोर पड़ जाती है, वहां अराजकता अपने पैर पसार लेती है।” विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक की चौखट पर इन दिनों कुछ ऐसे ही हालात देखने को मिल रहे हैं।
जायरीनों की आस्था के इस पवित्र स्थल पर असामाजिक तत्वों के हौसले लगातार बुलंद नजर आ रहे हैं। कभी जायरीनों से अभद्रता, कभी आपसी मारपीट तो कभी सोशल मीडिया पर वायरल होते वीडियो, दरगाह क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं। अब एक और वायरल वीडियो ने पूरे इंतजामों की हकीकत उजागर कर दी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कुछ युवक दरगाह शरीफ के पैताने पर बनी सिदिरियों के बाहर लाठी-डंडों के साथ एक-दूसरे पर हमला करते दिखाई दे रहे हैं। दोनों गुटों के बीच हुई इस मारपीट से मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। वीडियो में लोग इधर-उधर भागते नजर आ रहे हैं, जबकि कुछ लोग बीच-बचाव का प्रयास करते भी दिखाई पड़ते हैं।
गौरतलब है कि पिरान कलियर स्थित विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक की व्यवस्थाओं का संचालन जिला प्रशासन के अधीन है। व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए दरगाह कार्यालय स्थापित है, जहां एक प्रबंधक, कई सुपरवाइजर, दर्जनों कर्मचारी और पीआरडी जवान तैनात हैं। इसके बावजूद समय-समय पर जायरीनों से बदसलूकी, मारपीट और अव्यवस्था से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते रहते हैं, जो सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
जिस स्थान पर यह मारपीट हुई, वहां रोजाना बड़ी संख्या में जायरीन, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे बैठकर विश्राम करते हैं। ऐसे संवेदनशील स्थान पर खुलेआम लाठी-डंडों का चलना न केवल सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है, बल्कि किसी बड़े हादसे की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। यदि इस दौरान कोई महिला, बच्चा या बुजुर्ग मारपीट की चपेट में आ जाता, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी।
उल्लेखनीय है कि इसी स्थान पर पूर्व में मामूली विवाद के बाद हत्या जैसी गंभीर वारदात भी हो चुकी है। इसके बावजूद यदि असामाजिक तत्व खुलेआम मारपीट करने का दुस्साहस कर रहे हैं, तो यह सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र दोनों के लिए चिंता का विषय है।
अब सवाल यह है कि आखिर दरगाह क्षेत्र में तैनात सुरक्षा कर्मियों और जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद ऐसे तत्वों पर प्रभावी अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है? आस्था की इस पवित्र नगरी में बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाएं न केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती हैं, बल्कि लाखों जायरीनों की सुरक्षा और विश्वास से भी जुड़ा गंभीर मुद्दा बनती जा रही हैं।



