अपराधहरिद्वार

“हरिद्वार जिले में मीट के अवैध कटान का बड़ा खेल, फैक्ट्रियों से कुछ कुंतल मीट लाकर रुड़की-मंगलौर में बड़े पैमाने पर काटे जा रहे पशु..

जिले में मीट माफिया का बड़ा गैंग सक्रिय, बिलों का फर्जीवाड़ा कर अवैध कटान को दिया जा रहा संरक्षण, गौकशी को भी मिल रहा बढ़ावा..

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पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार; हरिद्वार जिले में मीट के अवैध कटान का बड़ा खेल चल रहा है। उत्तर प्रदेश की मीट फैक्ट्रियों से सीमित मात्रा में मीट लाकर रुड़की और मंगलौर में बड़े पैमाने पर पशुओं का कटान किया जा रहा है। जिले में कोई अधिकृत स्लॉटर हाउस नहीं होने के बावजूद कई स्थानों पर अवैध बूचड़खाने संचालित हो रहे हैं और यहीं से मीट को जिले के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाया जा रहा है। इस पूरे कारोबार में रुड़की को मीट माफिया के नेटवर्क का सेंटर प्वाइंट बनाया गया है। कुछ बिलों की आड़ में वास्तविक सप्लाई से कई गुना अधिक मीट का हिसाब दिखाकर स्थानीय स्तर पर होने वाले अवैध कटान को कागजों में वैध साबित करने का खेल चल रहा है।उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, कैराना और आसपास की मीट फैक्ट्रियों से हरिद्वार के लिए वैध मीट की सप्लाई होती है। लेकिन फैक्ट्रियों से आने वाली सीमित मात्रा और जिले में होने वाली खपत में बड़ा अंतर है। इसी अंतर को पाटने के लिए बिलों के फर्जीवाड़े का खेल किया जा रहा है। कुछ कुंतल मीट की वास्तविक सप्लाई के आधार पर कहीं अधिक मात्रा का हिसाब तैयार किया जाता है और उसी बिल को पूरे कारोबार की ढाल बना दिया जाता है।रुड़की-मंगलौर में कई जगह अवैध बूचड़खाने…..
रुड़की और मंगलौर क्षेत्र में कई स्थानों पर अवैध स्लॉटर हाउस और बूचड़खाने संचालित हो रहे हैं। इन जगहों पर बड़े पैमाने पर पशुओं का कटान किया जा रहा है। खास बात यह है कि यह कटान किसी अधिकृत स्लॉटर हाउस की व्यवस्था के तहत नहीं हो रहा। कटान के बाद तैयार मीट को छोटे विक्रेताओं और दुकानों तक पहुंचाया जाता है। यही वजह है कि रुड़की-मंगलौर को पूरे जिले में चल रहे अवैध मीट कारोबार की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। नेटवर्क सलेमपुर समेत आसपास के क्षेत्रों तक फैला है और अलग-अलग स्तर पर मीट की सप्लाई की जा रही है।पुलिस कार्रवाई ने खोली नेटवर्क की परत…..
हाल में हुई पुलिस कार्रवाई में इस पूरे खेल से जुड़े कई अहम संकेत मिले हैं। बिलों की वास्तविकता, मीट की मात्रा और कटान के स्रोत की जांच में कई स्तर पर गड़बड़ी सामने आई है। जांच के दौरान अलग-अलग स्तर पर मिलीभगत की बात भी सामने आई है, जिससे यह साफ हो रहा है कि मामला केवल अवैध कटान करने वालों तक सीमित नहीं है। बिल तैयार कराने से लेकर मीट की ढुलाई और बाजार तक पहुंचाने वाली पूरी कड़ी की भूमिका जांच के दायरे में है। जबकि कई स्तर पर मिलीभगत की चर्चाएं भी जोरों पर हैं।20 टन खपत, फिर कहां से आ रहा मीट..?
हरिद्वार जिले में प्रतिदिन करीब 20 टन से अधिक मीट की खपत बताई जाती है, जबकि वैध तरीके से बाहर से आने वाली सप्लाई 10 कुंतल से भी कम है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि बाकी मीट कहां से आ रहा है। यदि फैक्ट्रियों से निकलने वाली वास्तविक मात्रा, बिलों में दर्ज मात्रा और जिले में बिकने वाले मीट का मिलान किया जाए तो फर्जीवाड़े की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।सबसे गंभीर बात यह है कि भैंस वंशीय पशुओं के अवैध कटान के इस कारोबार की आड़ में गौकशी को भी बढ़ावा मिलने की शिकायतें हैं। इसलिए जांच केवल मीट दुकानों तक सीमित रखने के बजाय रुड़की-मंगलौर में संचालित अवैध बूचड़खानों, बिलों के नेटवर्क, परिवहन और पूरे मीट माफिया तंत्र तक पहुंचनी जरूरी है। सवाल यही है कि जिले में स्लॉटर हाउस नहीं होने के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर अवैध कटान कैसे चल रहा है और रुड़की-मंगलौर में सक्रिय इस मीट माफिया नेटवर्क पर अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

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