“अर्द्धकुंभ के निर्माण कार्यों की फिर खुली पोल, पीली व घटिया ईंट का खेल उजागर, भाजपा पार्षदों ने खोला मोर्चा..
निर्माण कार्यों में लगातार लग रहे भ्रष्टाचार के आरोप, कुंभकर्णी नींद में अफसर, जमकर हो रही बंदरबांट, पार्षद भड़के..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: अर्द्धकुंभ के नाम पर शहर में सैकड़ों करोड़ रुपये की लागत से कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की एक बार फिर पोल खुल गई है। कनखल में लोक निर्माण विभाग की ओर से कराए जा रहे फुटपाथ निर्माण में पीली और घटिया ईंट का खेल उजागर हुआ है। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता सामने आते ही भाजपा पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया और निर्माण कार्यों में गंभीर भ्रष्टाचार व बंदरबांट के आरोप लगाए।
अर्द्धकुंभ के तहत चौराहा, डिवाइडर और अन्य निर्माण कार्यों के बाद अब कनखल क्षेत्र में फुटपाथ निर्माण में भ्रष्टाचार सामने आया है। ऐसे में सवाल है कि करोड़ों रुपये के काम की निगरानी कर रहे अधिकारी आखिर कुंभकर्णी नींद में क्यों हैं? इससे भी बड़ा सवाल यह है कि मेला अधिष्ठान की जिम्मेदारी क्या सिर्फ बजट जारी करना है..?
अर्द्धकुंभ को लेकर लोक निर्माण विभाग, हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण समेत कई एजेंसियां निर्माण कार्यों में जुटी हैं। सड़क, फुटपाथ, डिवाइडर और चौराहों के काम पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। कनखल का ताजा मामला अब निर्माण की गुणवत्ता के साथ विभागीय निगरानी पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
भूपेंद्र ने मौके पर दिखाई ईंटें, ठेकेदार पर मनमानी का आरोप….
भाजपा पार्षद भूपेंद्र कुमार ने निर्माण स्थल पर विरोध प्रदर्शन करते हुए मौके पर रखी पीली और घटिया ईंटें मीडिया कर्मियों को दिखाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि अर्द्धकुंभ के नाम पर जनता का करोड़ों रुपये खर्च हो रहा है, लेकिन निर्माण में गुणवत्ता के मानकों की अनदेखी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि ठेकेदार अपनी मनमर्जी से काम कर रहा है। मौके पर विभागीय अभियंता और जूनियर अभियंता की मौजूदगी नहीं होने से निर्माण की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। जब सामग्री की जांच और काम की गुणवत्ता देखने वाला जिम्मेदार अधिकारी ही मौके पर नहीं होगा तो ठेकेदार पर नियंत्रण कैसे रहेगा।
भूपेंद्र कुमार ने कहा कि अर्द्धकुंभ के लिए तैयार किए जा रहे निर्माण आने वाले वर्षों में जनता के उपयोग में आएंगे। ऐसे में घटिया सामग्री से काम कराना सिर्फ गुणवत्ता से समझौता नहीं, बल्कि सरकारी धन के इस्तेमाल पर भी सवाल खड़ा करता है। उन्होंने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से करने और निर्माण सामग्री की जांच के साथ जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय कराने की बात कही।
सचिन अग्रवाल ने भी जताई नाराजगी….
भाजपा पार्षद सचिन अग्रवाल ने भी निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकारी धन की बंदरबांट की जा रही है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने मौके पर निरीक्षण कर सामग्री की गुणवत्ता जांचने और खामी मिलने पर कार्रवाई की मांग की।
अफसरों की निगरानी पर उठे सवाल…
मामला सामने आने के बाद अब निगाहें संबंधित विभाग के अधिकारियों पर हैं। करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य चल रहे हैं, लेकिन यदि मौके पर विभागीय अभियंता और जूनियर अभियंता की मौजूदगी नहीं है तो गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर हो रही है, यह बड़ा सवाल है।
अर्द्धकुंभ की तैयारियों के बीच घटिया सामग्री का मामला सामने आना सिर्फ ठेकेदार की कार्यप्रणाली नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था की भी परीक्षा है। अब देखना होगा कि मेला अधिष्ठान और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मौके पर जांच कर आरोपों की हकीकत सामने लाते हैं या फिर यह मामला भी और अर्द्धकुंभ के निर्माण कार्यों में बाकी भ्र्ष्टाचार की तरह कागजों में सिमट जाता है।



