अपराधहरिद्वार

“ज्वालापुर में धार्मिक संपत्ति पर कब्जे की तैयारी और हिंदूवादी नेता को धमकी भरी कॉल, डीएम से अब दूसरी बार शिकायत..

सत्ताधारियों में पक रही करोड़ों की खिचड़ी, एक दर्जाधारी और एक बड़े नेता ने जमाया अखाड़ा, संपत्ति को प्रशासन के संरक्षण में लेने की उठ रही मांग..

खबर को सुनें

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार; ज्वालापुर के पीठ बाजार स्थित नाले किनारे की करोड़ों की धार्मिक संपत्ति को लेकर विवाद फिर गरमा गया है। हिन्दू क्रांति दल के अध्यक्ष चरणजीत पाहवा ने जिलाधिकारी को दूसरी बार शिकायत देकर संपत्ति पर कब्जे की तैयारी का आरोप लगाया है। पाहवा का दावा है कि जमीन को कब्जाने के लिए कथित तौर पर फर्जी एग्रीमेंट तैयार किया गया और अब यहां गेट लगाने की कोशिश की जा रही है। मामला तब और गंभीर हो गया, जब उनके मुताबिक दो अक्टूबर को मुजफ्फरनगर से उन्हें धमकी भरी कॉल आई। फोन पर कथित तौर पर जमीन के मामले से किनारा करने और फेसबुक पर शिकायत नहीं करने को कहा गया।पाहवा के अनुसार, उक्त संपत्ति करीब 90 वर्षों से धार्मिक संपत्ति है और नगर निगम के अभिलेखों में दर्ज है। करीब 15 दिन पहले वह मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी, सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम हरिद्वार को शिकायत भेज चुके हैं। कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए तीन अक्टूबर को उन्होंने जिलाधिकारी को दोबारा शिकायत दी और जमीन को तत्काल प्रशासन के संरक्षण में लेने की मांग की।शिकायत में कहा गया है कि जब तक जमीन के दस्तावेज और कथित एग्रीमेंट की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक प्रशासन संपत्ति पर अपना बोर्ड लगाए और उसकी बाउंड्री कराकर उसे सुरक्षित करे। पाहवा का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण शिकायत के बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ रही है।दर्जाधारी और बड़े नेता की भूमिका की चर्चा….
करोड़ों की इस संपत्ति को लेकर सूत्रों के हवाले से एक दर्जाधारी और एक बड़े नेता के साथ कुछ रसूखदार लोगों के कथित जुड़ाव की चर्चा है। भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं और भू-माफिया के गठजोड़ की बातें भी सामने आ रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में जमीन के दस्तावेज, कथित एग्रीमेंट और कब्जे की कोशिश की जांच से ही तस्वीर साफ होगी।धमकी भरी कॉल ने बढ़ाए सवाल….
पाहवा के मुताबिक, मुजफ्फरनगर से आए फोन में उन्हें जमीन के मामले से दूर रहने और सोशल मीडिया पर शिकायत नहीं करने की बात कही गई। उन्होंने इसे दबाव बनाने की कोशिश बताते हुए प्रशासन से संपत्ति को अपने संरक्षण में लेने की मांग की है।अब सवाल यह भी उठ रहा है कि धार्मिक संपत्ति पर कथित कब्जे की तैयारी और शिकायतकर्ता को धमकी दिए जाने के आरोपों के बावजूद प्रशासन अब तक क्यों सुस्त है? वहीं सनातन संस्कृति और धार्मिक संपत्तियों के संरक्षण की बात करने वाले सत्ताधारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। करोड़ों की संपत्ति से जुड़े इस मामले में अब प्रशासनिक जांच ही बताएगी कि जमीन के पीछे चल रहे कथित खेल की हकीकत क्या है।

Advt.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advt.
Back to top button
error: Content is protected !!