“मेडिकेटेड साबुन की GST दर बनी उद्योग के लिए सिरदर्द, निवेश और रोजगार पर असर का डर..
भगवानपुर-रुड़की-इकबालपुर की इकाइयों ने मांगी स्पष्ट व्यवस्था, रिफंड में देरी से भी बढ़ रहा आर्थिक दबाव..

पंच👊नामा
रुड़की; भगवानपुर, रुड़की और इकबालपुर समेत आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित फार्मा एवं संबद्ध उद्योगों में मेडिकेटेड और टॉयलेट साबुन पर जीएसटी दर को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उद्योग प्रतिनिधियों का आरोप है कि केंद्रीय जीएसटी विभाग के कुछ अधिकारी विनिर्माण इकाइयों का निरीक्षण कर इन उत्पादों पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी भुगतान करने का दबाव बना रहे हैं। वहीं उद्योग का दावा है कि संबंधित अधिसूचना के तहत इन उत्पादों पर पांच प्रतिशत जीएसटी लागू है।
उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के मुताबिक केंद्र सरकार की अधिसूचना संख्या 9/2025-केंद्रीय कर (दर), 17 सितंबर 2025 के तहत टैरिफ मद 34011110 में शामिल टॉयलेट साबुन की जीएसटी दर घटाकर पांच प्रतिशत की गई थी। उद्योग का कहना है कि इसमें मेडिकेटेड टॉयलेट साबुन भी शामिल है। इसके बाद निर्माताओं ने 22 सितंबर 2025 से एमआरपी में कमी कर जीएसटी कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया।
अब कथित तौर पर कुछ इकाइयों से उन्हीं उत्पादों पर 18 प्रतिशत की दर से कर भुगतान की मांग किए जाने से उद्योग में चिंता बढ़ गई है। प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि उत्पादों के वर्गीकरण व जीएसटी दर को लेकर कोई विवाद है तो उसका निस्तारण नियमानुसार नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए।
उद्योग ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में औपचारिक कारण बताओ नोटिस या कर निर्धारण के बिना भुगतान का दबाव बनाया जा रहा है। वहीं उल्टे कर ढांचे के तहत मिलने वाले जीएसटी रिफंड में देरी से कंपनियों की कार्यशील पूंजी प्रभावित होने की बात भी कही गई है।
उद्योग प्रतिनिधियों ने चेताया कि जीएसटी दर को लेकर लंबे समय तक असमंजस रहने से निवेश, उत्पादन और रोजगार पर असर पड़ सकता है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार, वित्त विभाग और संबंधित जीएसटी अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप कर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि सभी औद्योगिक इकाइयों पर एक समान व्यवस्था लागू हो सके।



