पंच👊नामा-ब्यूरो
चमोली; बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले ने अब आपराधिक जांच का रूप ले लिया है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष कार्यालय में तैनात वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल के विरुद्ध कोतवाली बदरीनाथ में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
प्रारंभिक विभागीय जांच में प्रथम दृष्टया मंदिर की थाली भेंट की धनराशि को अवैध रूप से अपने साथ ले जाने की पुष्टि होने के बाद उन्हें पहले निलंबित किया गया और अब उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर गढ़वाल आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति भी गठित की गई है, जिसे 15 दिन के भीतर शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।
बीकेटीसी की चार सदस्यीय जांच समिति की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि दो जुलाई 2026 को थाली भेंट की गणना के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। नियम के अनुसार मौजूद रहने वाले तीन अनिवार्य कार्मिक मौके पर नहीं थे और वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल ने अकेले ही गणना कराई।
जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल में भी अहम तथ्य सामने आए। फुटेज में सुबह लगभग 9:00 बजे से 9:30 बजे के बीच प्रमोद नौटियाल द्वारा गणना स्थल से नोटों के बंडल ले जाते हुए संदिग्ध गतिविधियां दर्ज होने की बात सामने आई। विभागीय जांच में प्रथम दृष्टया मंदिर की धनराशि को गणना स्थल से अवैध रूप से उठाकर ले जाने की पुष्टि होने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया।
कोतवाली बदरीनाथ में दर्ज कराई गई तहरीर में प्रभारी मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पवान ने कहा है कि सोशल मीडिया के माध्यम से मिली सूचना के आधार पर अध्यक्ष के निर्देश पर विभागीय जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में संबंधित कार्मिक की भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाए जाने के बाद कार्यालय आदेश संख्या 250/जांच/2026-27 दिनांक 7 जुलाई 2026 के तहत उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए।
तहरीर में स्पष्ट आरोप लगाया गया है कि मंदिर समिति की थाली भेंट की धनराशि को संबंधित कार्मिक ने “अवैध रूप से अपने निजी हित में अपने साथ ले गया”, जिसके आधार पर पुलिस से एफआईआर दर्ज कर विधिक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया।
उधर, पुलिस ने मंदिर समिति की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब पुलिस सीसीटीवी फुटेज, गणना प्रक्रिया से जुड़े अभिलेखों, ड्यूटी पर तैनात कार्मिकों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल करेगी। वहीं, शासन स्तर पर गठित उच्चस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के बाद मामले में आगे की कार्रवाई और भी तेज होने की संभावना है।



