“अखाड़ा परिषद की सियासत में बड़ा उलटफेर: निर्मोही अखाड़ा खुलकर मौजूदा नेतृत्व के साथ, संत बोले, इसी अगुवाई में संपन्न होंगे दिव्य-भव्य कुंभ..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद को लेकर चल रहे विवाद के बीच मंगलवार को संत समाज की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। उज्जैन स्थित श्री पंच निर्मोही अणी अखाड़े ने मौजूदा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के समर्थन का ऐलान कर दिया। अखाड़े के पंचों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि आगामी नासिक, हरिद्वार, उज्जैन और प्रयागराज के कुंभ एवं सिंहस्थ मेले मौजूदा परिषद के नेतृत्व में ही किए जाएंगे।
श्री पंच निर्मोही अणी अखाड़े में आयोजित बैठक की अध्यक्षता अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने की। बैठक में श्रीमहंत मदन मोहन दास महाराज, श्रीमहंत भगवान दास महाराज, श्रीमहंत सीताराम दास महाराज समेत अखाड़े के सभी पंचों ने खुलकर मौजूदा परिषद के समर्थन का ऐलान किया।
बैठक के बाद श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि श्रीमहंत मदन मोहन दास महाराज के आमंत्रण पर शैव, निर्मल और उदासीन अखाड़ों के संत एकत्र हुए। सभी ने विचार-विमर्श के बाद तय किया कि चारों प्रमुख कुंभ मेलों में अखाड़ों की भागीदारी मौजूदा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नेतृत्व में ही होगी। उन्होंने कहा कि संत समाज की एकजुटता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और कुंभ जैसे धार्मिक आयोजनों की गरिमा भी इसी से कायम रहेगी।
श्रीमहंत मदन मोहन दास महाराज ने कहा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद देश के साधु-संतों की सर्वोच्च संस्था है। वर्तमान में इसका नेतृत्व श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज और परिषद के महामंत्री हरिगिरि महाराज कर रहे हैं। निर्मोही अखाड़े के लाखों साधु-संत और नागा संन्यासी मौजूदा परिषद के साथ हैं और आगामी कुंभ मेलों के शाही स्नान सहित सभी धार्मिक आयोजनों में इसी नेतृत्व का अनुसरण करेंगे।
अखाड़ा परिषद के नेतृत्व को लेकर हाल के दिनों में संत समाज के भीतर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। ऐसे समय में निर्मोही अणी अखाड़े का खुला समर्थन मौजूदा परिषद के लिए बड़ी राजनीतिक और धार्मिक ताकत माना जा रहा है। संतों का मानना है कि इस फैसले से परिषद के नेतृत्व को नई मजबूती मिलेगी और कुंभ की तैयारियों को लेकर फैल रहे भ्रम पर भी विराम लगेगा।
बैठक में आनंद अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष और परिषद के कोषाध्यक्ष श्रीमहंत शंकरानंद सरस्वती महाराज, जूना अखाड़े के राष्ट्रीय सचिव श्रीमहंत रामेश्वर गिरि महाराज, श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़े के प्रतिनिधि रघुमुनि महाराज, श्री पंचायती निर्मल अखाड़े के प्रतिनिधि, अग्नि अखाड़े, आवाहन अखाड़े समेत विभिन्न अखाड़ों के संत-महात्मा मौजूद रहे।



