“बारिश ने धो डाले उर्स मेले की व्यवस्थाओं के दावे, मेला ग्राउंड और सड़के बनी तालाब..
नालों की सफाई पर उठे सवाल, झूला-सर्कस ग्राउंड और बाजारों में जलभराव से दुकानदार परेशान..

पंच👊नामा
पिरान कलियर; साबिर पाक के सालाना उर्स/मेले में व्यवस्थाओं को लेकर किए गए दावों की शुक्रवार शाम तेज बारिश ने मानो परीक्षा ले ली और कुछ ही देर में नतीजा सबके सामने था। एक झटके में हुई मूसलाधार बारिश ने मेला ग्राउंड को तालाब में तब्दील कर दिया,
जबकि बाजारों और सड़कों पर पानी व कीचड़ का ऐसा आलम दिखाई दिया कि व्यवस्थाओं पर खर्च हुए लाखों रुपये भी सवालों के घेरे में आ गए। खासतौर पर झूला-सर्कस ग्राउंड और उसके बाहर का मार्ग पानी से इस कदर भर गया कि वहां आने-जाने वाले लोग और दुकानदार खासे परेशान नजर आए।
उर्स/मेले से पहले नालों की सफाई और व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के दावे किए गए थे, लेकिन बारिश के बाद सड़कों पर जमा पानी उन दावों की हकीकत बयां करता दिखाई दिया। हालात देखकर सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि नालों की सफाई वास्तव में समुचित ढंग से हुई थी, तो चंद देर की बारिश के बाद पानी आखिर सड़कों और बाजारों में क्यों नजर आया? ऐसा लगा मानो बारिश ने आते ही व्यवस्थाओं की पूरी रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रख दिया हो।
शुक्रवार को उर्स की 14वीं तारीख पर गुस्ल शरीफ के बाद जायरीनों के लौटने का दौर शुरू हुआ। वहीं जुमे की नमाज के बाद पिरान कलियर में मेला घूमने वाले लोगों की भीड़ भी बढ़ गई। दिनभर रौनक से भरे बाजारों में शाम होते-होते तेज बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं और देखते ही देखते कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति पैदा हो गई।
झूला-सर्कस ग्राउंड और उसके बाहर का मार्ग तो मानो तालाब बन गया। पानी भरने से झूला-सर्कस ठेकेदार के साथ ही सड़क किनारे दुकानें लगाने वाले दुकानदारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई दुकानों के सामने पानी जमा हो गया, जबकि बाजारों में कीचड़ फैलने से पैदल चलना भी मुश्किल हो गया। दुकानदार खुद झाड़ू लेकर दुकानों के सामने जमा पानी और कीचड़ को साफ करते नजर आए।
दुकानदारों की नाराजगी इस बात को लेकर भी रही कि इस बार उनसे दुकान लगाने के लिए रसीद कटवाने के साथ-साथ बिजली के नाम पर भी अधिक शुल्क लिया गया। कुछ दुकानदारों का कहना है कि बिजली के नाम पर उनसे अपेक्षाकृत अधिक रकम वसूली गई,
लेकिन व्यवस्थाओं के नाम पर सुविधाएं ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुईं। उनका सवाल है कि जब शुल्क वसूला गया, तो बारिश और जलभराव जैसी पहले से अनुमानित परिस्थितियों से निपटने के लिए बेहतर इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
दरअसल, प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित विभागों को पहले से मालूम था कि इस बार साबिर पाक का सालाना उर्स/मेला बरसात के मौसम में आयोजित हो रहा है। ऐसे में जलनिकासी, नालों की सफाई और बाजारों में पानी निकासी की व्यवस्था को प्राथमिकता दिए जाने की जरूरत थी। मगर शुक्रवार की बारिश ने जो तस्वीर पेश की, उसने तैयारियों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया।
कहा जा सकता है कि व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए भले ही लाखों रुपये खर्च किए गए हों, लेकिन तेज बारिश ने कुछ ही घंटों में उन इंतजामों की परतें खोल दीं। अब सवाल यह है कि आने वाले दिनों में यदि फिर तेज बारिश हुई तो जायरीनों,
दुकानदारों और मेला घूमने आने वाले लोगों को इसी तरह जलभराव और कीचड़ से जूझना पड़ेगा या फिर जिम्मेदार विभाग समय रहते व्यवस्था को वास्तव में दुरुस्त करेंगे। फिलहाल, शुक्रवार की बारिश ने इतना जरूर साबित कर दिया कि कागजों पर साफ हुए नाले और जमीन पर साफ दिखाई देने वाली व्यवस्था—दोनों में फर्क होना नहीं चाहिए।



