
पंच👊नामा-ब्यूरो
उत्तराखंड: चंपावत के बहुचर्चित नाबालिग दुष्कर्म प्रकरण में पुलिस जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। पुलिस का दावा है कि मामला बदले की भावना में रचा गया सुनियोजित षड्यंत्र हो सकता है। वैज्ञानिक, डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर की गई जांच में कई तथ्य प्रारंभिक आरोपों से मेल नहीं खा रहे हैं।
छह मई को कोतवाली चंपावत में एक व्यक्ति ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसकी 16 वर्षीय पुत्री के साथ तीन लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। वहीं पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने क्षेत्राधिकारी के पर्यवेक्षण में 10 सदस्यीय एसआईटी गठित कर गहन और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए।
एसपी रेखा यादव ने स्वयं पीड़िता से बातचीत की और घटनास्थल पहुंचकर स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाई। आरएफएसएल टीम को मौके पर बुलाकर वैज्ञानिक तरीके से घटनास्थल का परीक्षण कराया गया। साथ ही पीड़िता का मेडिकल परीक्षण, सीडब्ल्यूसी के समक्ष काउंसिलिंग और न्यायालय में बयान भी दर्ज कराए गए।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि घटना वाले दिन पीड़िता गांव सल्ली में आयोजित विवाह समारोह में अपनी इच्छा से अपने एक दोस्त के साथ गई थी। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और सीडीआर के जरिए उसके आवागमन और गतिविधियों का सत्यापन किया गया। पुलिस के अनुसार मेडिकल परीक्षण में किसी प्रकार की बाहरी या आंतरिक चोट, संघर्ष अथवा जबरदस्ती के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं।
विवेचना में कुछ गवाहों के बयान भी तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से मेल नहीं खा रहे हैं। वहीं नामजद आरोपितों विनोद सिंह रावत, नवीन सिंह रावत और पूरन सिंह रावत की घटना स्थल पर मौजूदगी भी जांच में प्रमाणित नहीं हुई। पुलिस का कहना है कि घटना की तिथि पर कमल रावत, पीड़िता और उसकी महिला मित्र के बीच लगातार संपर्क पाया गया, जिससे मामले में साजिश की आशंका मजबूत हुई है।
एसपी रेखा यादव ने कहा कि महिला एवं बाल अपराधों के प्रति पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति है। किसी भी निर्दोष को प्रताड़ित न हो, इसके लिए हर तथ्य की निष्पक्ष जांच की जा रही है। यदि आरोप भ्रामक या मनगढ़ंत पाए गए तो संबंधित लोगों के खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



