
पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार: भगवानपुर क्षेत्र के तेलपुरा-बुग्गावाला मार्ग पर 140 बीघा जमीन पर बसाई जा रही अवैध कॉलोनी के मामले में आखिरकार प्रशासन ने सख्ती दिखा दी। इस पूरे प्रकरण को दो दिन पहले प्रमुखता से उठाए जाने के बाद इसका सीधा असर देखने को मिला और हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) की टीम ने मौके पर पहुंचकर ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चला दिया।
इस कार्रवाई की सबसे अहम बात यह रही कि अवैध कॉलोनी की ढाल बनकर खड़े भाकियू के एक गुट की सक्रियता भी प्रशासनिक कार्रवाई को नहीं रोक सकी। कॉलोनी में संगठन का होर्डिंग लगाकर प्लाटिंग को वैध दिखाने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन एचआरडीए की टीम ने साफ कर दिया कि किसी भी तरह की संगठनात्मक या राजनीतिक आड़ अब नहीं चलेगी।
मंगलवार को एचआरडीए की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और बिना नक्शा पास कराए की जा रही प्लाटिंग, अवैध रूप से बनाई गई दुकानों और निर्माणों को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया। कॉलोनी के भीतर बनाई गई सड़कों को उखाड़ दिया गया, जबकि संगठन के नाम पर चल रहा कार्यालय, जहां से जमीन बेचने का खेल संचालित हो रहा था, उसे भी पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया।
करीब 140 बीघा बाग और कृषि भूमि पर विकसित की जा रही इस कॉलोनी में नियमों को पूरी तरह ताक पर रखा गया था। आम लोगों को सुनहरे सपने दिखाकर प्लॉट बेचे जा रहे थे, जबकि हकीकत में यह पूरा खेल अवैध तरीके से चल रहा था। इस प्रक्रिया में कई किसान परिवार भी झांसे में आ गए और अपनी जमीन या जमा पूंजी गंवाने की कगार पर पहुंच गए।
स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह सवाल उठ रहे थे कि आखिर नोटिस के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। छोटे-छोटे निर्माणों पर तुरंत बुलडोजर चलाने वाला तंत्र यहां सुस्त क्यों पड़ा था। लेकिन खबर सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया और एक ही दिन में पूरी तस्वीर बदल दी।
एचआरडीए की उपाध्यक्ष सोनिका ने साफ कहा कि अवैध कॉलोनियों का खेल अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लोगों को गुमराह कर कमाई करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान जारी रहेगा और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
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भारतीय किसान यूनियन के नाम पर कुकुरमुत्तों की तरह उग आए ऐसे संगठनों के लिए यह कार्रवाई एक सीधी चेतावनी है। किसान हितों की राजनीति का चोला पहनकर अवैध कॉलोनियों, खनन और अन्य गैरकानूनी धंधों में संलिप्त रहने वाले गुटों को अब समझ लेना चाहिए कि कानून से बड़ा कोई नहीं।
किसान की जमीन, मेहनत और हक की बात करने के बजाय जो संगठन निजी फायदे के लिए अवैध कारोबार की ढाल बनते हैं, उनका असली चेहरा अब उजागर हो रहा है। प्रशासन की यह कार्रवाई साफ संकेत है—किसान के नाम पर खेल करने वालों के दिन अब लंबे नहीं हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि जिस भूमि पर अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही थी, उसमें ग्राम पंचायत की जमीन भी शामिल है। यह तथ्य सामने आने के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है और कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखने वाली बात होगी कि पंचायत भूमि के दुरुपयोग और संभावित मिलीभगत को लेकर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।



