
पंच👊नामा-ब्यूरो
देहरादून; “जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो रिश्तों पर भी सवाल खड़े हो जाते हैं।” देहरादून में सामने आए एक सनसनीखेज मामले ने ममता को शर्मसार कर दिया। जिस मां ने अपनी नाबालिग बेटी के अपहरण की कहानी सुनाकर पुलिस से मदद मांगी थी, वही पूरे षड्यंत्र की सूत्रधार निकली। दून पुलिस ने मामले का पर्दाफाश करते हुए नाबालिग की खरीद-फरोख्त के गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने पीड़िता की मां समेत चार आरोपियों को उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार कर नाबालिग को सकुशल बरामद कर लिया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोबाल के निर्देश पर मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। पुलिस ने मोबाइल सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और मैनुअल पुलिसिंग के जरिए पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच की। जांच के दौरान पुलिस को नाबालिग के उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में होने की जानकारी मिली, जिसके बाद तत्काल पुलिस टीम रवाना की गई और गोपनीय कार्रवाई करते हुए नाबालिग को सकुशल बरामद कर लिया गया।
राजपुर थानाध्यक्ष पीडी भट्ट के नेतृत्व में की गई कार्रवाई के दौरान मनीष और लवी कुमार को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि नाबालिग की मां नीलम देवी ने आर्थिक तंगी के चलते अपनी 15 वर्षीय बेटी का सौदा डेढ़ लाख रुपये में पिंकी मलिक के माध्यम से किया था। इसके बाद लवी कुमार ने उसी युवती को दो लाख रुपये में मनीष को विवाह के उद्देश्य से बेच दिया। सौदे की पूरी रकम नहीं मिलने और खुद के फंसने के डर से नीलम देवी ने बेटी के अपहरण की झूठी कहानी गढ़कर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दी।
पुलिस ने पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर पिंकी मलिक तथा नीलम देवी को भी गिरफ्तार कर लिया। विवेचना में सामने आए तथ्यों के आधार पर मुकदमे में विभिन्न गंभीर धाराओं के साथ पोक्सो अधिनियम की धाराएं भी बढ़ाई गई हैं। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी पहले भी इस प्रकार की वारदातों में शामिल रहे हैं या नहीं तथा इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका क्या रही है। गिरफ्तार आरोपी मनीष निवासी मुजफ्फरनगर, लवी कुमार निवासी मेरठ, पिंकी मलिक निवासी मुजफ्फरनगर तथा नीलम देवी निवासी सहस्त्रधारा रोड, देहरादून हैं।
इस सराहनीय कार्रवाई को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में राजपुर थानाध्यक्ष उपनिरीक्षक पीडी भट्ट, उपनिरीक्षक अनित कुमार, महिला उपनिरीक्षक सीमा चौहान (विवेचक), कांस्टेबल मोहित, कांस्टेबल अमित व हेड कांस्टेबल किरण (एसओजी) शामिल रहे।


