“ख़िदमत, सहूलियत और बेहतरी की मिसाल बना सार्वजनिक कब्रिस्तान, दो साल में किए रिकॉर्ड तोड़ काम, पूरे उत्तराखंड में बनाया नाम..
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स की अध्यक्षता वाली बैठक में मिली थी कमेटी को जिम्मेदारी, अब 298 शवों का निशुल्क दफन; 12 लावारिसों को भी नसीब हुई कब्र की गोद..

पंच👊नामा-ब्यूरो
देहरादून/हरिद्वार। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के तहत सुभाष नगर, ज्वालापुर स्थित सार्वजनिक कब्रिस्तान आज सेवा, सहूलियत और बेहतर प्रबंधन की एक मिसाल बनकर सामने आया है।
साल 2023 में बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस कब्रिस्तान की जिम्मेदारी एक प्रबंधन समिति को सौंपी गई थी, जिसकी कमान अहसान अंसारी को दी गई। दो साल के भीतर समिति ने ऐसे काम किए, जिनकी अब पूरे उत्तराखंड में चर्चा हो रही है।
समिति अध्यक्ष अहसान अंसारी के मुताबिक, शुरुआत में कब्रिस्तान की हालत ठीक नहीं थी। साफ-सफाई की कमी, ऊबड़-खाबड़ जमीन और बुनियादी सुविधाओं का अभाव बड़ी समस्या थी।
ऐसे में सबसे पहले सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराई गई, जमीन को समतल कराया गया और लोगों के आने-जाने के लिए रास्ते बनाए गए। इसके साथ ही सबसे जरूरी सुविधा—पेयजल—पर खास ध्यान दिया गया। अब कब्रिस्तान में पर्याप्त पानी की व्यवस्था है, जिससे अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को राहत मिल रही है।
समिति ने सिर्फ विकास कार्यों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि इंसानियत की मिसाल भी पेश की। वक्फ बोर्ड के निर्देश पर लावारिस शवों के सम्मानजनक दफन की व्यवस्था शुरू की गई। पुलिस के जरिए मिलने वाले ऐसे शवों को बिना किसी शुल्क के पूरे सम्मान के साथ दफनाया जा रहा है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो समिति अब तक कुल 298 शवों को निशुल्क दफना चुकी है, जिनमें 12 लावारिस शव भी शामिल हैं। हर शव को धार्मिक तरीके से दफनाया जाता है, ताकि किसी भी तरह की कमी या बेअदबी की गुंजाइश न रहे।
सीसीटीवी कैमरों से निगरानी…..
कब्रिस्तान को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए आधुनिक इंतजाम भी किए गए हैं। परिसर के अंदर और मुख्य गेट के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिससे निगरानी मजबूत हुई है और असामाजिक तत्वों पर लगाम लगी है।
दफन होने वाले शवों का रिकॉर्ड…..
पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दफन किए गए सभी शवों का रिकॉर्ड भी रखा जा रहा है। इसके लिए एक रजिस्टर तैयार किया गया है, जिसमें हर शव की पूरी जानकारी दर्ज होती है। इससे जरूरत पड़ने पर परिजनों और संबंधित लोगों को आसानी से जानकारी मिल जाती है।
स्थानीय सुझावों पर अमल…
समिति के सदस्य समय-समय पर कब्रिस्तान का निरीक्षण करते हैं और जरूरत के मुताबिक सुधार करते रहते हैं। स्थानीय लोगों के सुझावों को भी अहमियत दी जाती है, जिससे व्यवस्थाएं लगातार बेहतर हो रही हैं।
आने वाले वक्त में और बेहतर व्यवस्थाएं….
कमेटी के सदर अहसान अंसारी का कहना है कि आने वाले समय में कब्रिस्तान को और बेहतर बनाने की योजना है। इसमें विस्तार, हरियाली बढ़ाना और अतिरिक्त सुविधाएं विकसित करना शामिल है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह का पारदर्शी और जिम्मेदार प्रबंधन न सिर्फ कब्रिस्तान की सूरत बदल रहा है, बल्कि समाज में एक सकारात्मक संदेश भी दे रहा है।
कुल मिलाकर, सुभाष नगर, ज्वालापुर का यह सार्वजनिक कब्रिस्तान अब खिदमत, सहूलियत और बेहतरी की ऐसी मिसाल बन चुका है, जिसने दो साल में ही पूरे उत्तराखंड में अपनी अलग पहचान बना ली है।



