“हाईकोर्ट पहुंचा मामला तो हरकत में आया शिक्षा विभाग.! नेशनल इंटर कॉलेज प्रबंधन से 15 दिन में मांगा जवाब..
महिला शिक्षिका के आरोपों के बाद विभाग ने रिकॉर्ड किए तलब, जवाब नहीं देने पर कार्रवाई के संकेत..

पंच👊नामा-ब्यूरो
हरिद्वार; लंबे समय से विवादों में घिरे नेशनल इंटर कॉलेज, धनौरी का एक और मामला अब शिक्षा विभाग और न्यायालय की निगरानी में पहुंच गया है। पूर्व महिला शिक्षिका रेनू कुमारी की याचिका पर उत्तराखंड हाईकोर्ट में सुनवाई के कुछ घंटों बाद ही हरिद्वार के प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी ने कॉलेज प्रबंधन से पूरे प्रकरण में 15 दिनों के भीतर अभिलेख, स्पष्टीकरण और जवाब तलब कर लिया है। विभाग की इस कार्रवाई ने कॉलेज प्रबंधन की कार्यप्रणाली और महिला शिक्षिका के खिलाफ की गई विभागीय कार्रवाई पर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी, हरिद्वार की ओर से जारी आदेश में कॉलेज प्रबंधक को निर्देश दिए गए हैं कि वह 15 दिनों के भीतर पूरे प्रकरण से संबंधित अभिलेख, स्पष्टीकरण और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पूर्व में भी अभिलेख मांगे गए थे, लेकिन प्रबंधन की ओर से उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। आदेश के अनुसार, कॉलेज प्रबंधन ने वर्ष 2026 में रेनू कुमारी के खिलाफ जांच समिति गठित कर आरोप पत्र जारी करने और विभागीय जांच शुरू करने की जानकारी दी थी। वहीं दूसरी ओर, विभाग का कहना है कि शिक्षिका के शैक्षिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन और पूरे प्रकरण से जुड़े अभिलेख अब तक प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
रेनू कुमारी का कहना है कि उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन वर्षों पहले तत्कालीन प्रधानाचार्य बिजेंद्र कुमार द्वारा सक्षम स्तर से कराया जा चुका था। इसके बावजूद दोबारा फर्जी डिग्री का आरोप लगाकर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई, जिसे उन्होंने पूर्वाग्रहपूर्ण और प्रताड़नात्मक कार्रवाई बताया है। महिला शिक्षिका का आरोप है कि वर्ष 2022 में कॉलेज में हुई कथित फर्जी नियुक्तियों का साथ नहीं देने पर उन्हें लगातार मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कॉलेज प्रबंधक आदेश कुमार ने उनसे पैसों की मांग की। इन आरोपों को लेकर उन्होंने विधि विशेषज्ञ कृष्णकांत के माध्यम से उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
बताया गया कि कोर्ट में सुनवाई के कुछ घंटों बाद ही शिक्षा विभाग ने कॉलेज प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया। विभाग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि में अभिलेख और स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं कराया गया तो संबंधित प्रबंधक स्वयं आगामी कार्रवाई के लिए उत्तरदायी होंगे।
गौरतलब है कि नेशनल इंटर कॉलेज, धनौरी पहले भी कथित फर्जी नियुक्तियों, प्रबंध समिति से जुड़े विवादों व सरकारी एवं ग्राम समाज की भूमि से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद शिक्षा विभाग की सक्रियता को पूरे मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कॉलेज प्रबंधन विभाग के समक्ष क्या जवाब प्रस्तुत करता है और जांच के दौरान इस विवाद से जुड़े किन-किन तथ्यों से पर्दा उठता है।



